पिड़ावा। क्षेत्र में लगातार हुई बारिश के बाद मौसम खुलते ही किसानों ने खरीफ फसलों की निराई-गुड़ाई का कार्य तेज कर दिया है। इस वर्ष क्षेत्र में सोयाबीन की अपेक्षा मक्का और उड़द की बुआई अधिक हुई है। लगातार बारिश के कारण खेतों में खरपतवार तेजी से उग आने से किसान फसलों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक तरीकों से निराई में जुट गए हैं।
किसानों का कहना है कि यदि समय पर खरपतवार नहीं हटाई गई तो फसल की बढ़वार और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि सुबह से ही किसान कुल्पा और बेल जोड़ी लेकर खेतों में पहुंच रहे हैं। बड़े किसान ट्रैक्टर की सहायता से गुड़ाई करवा रहे हैं, जबकि छोटे किसान पारंपरिक तरीके से कतारों के बीच उगी घास निकाल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भी हाथों से खरपतवार साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ फसलों की बुआई के 20 से 25 दिनों के भीतर पहली निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है। इससे खरपतवार फसल के पोषक तत्व और नमी नहीं सोख पाती तथा फसल का विकास बेहतर होता है।
किसानों ने बताया कि सोयाबीन और उड़द की फसलों में खरपतवार बहुत तेजी से बढ़ती है, जबकि मक्का में भी समय पर निराई-गुड़ाई करना जरूरी है। फिलहाल मौसम साफ होने से किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में कार्य कर रहे हैं, ताकि फसल की अच्छी बढ़वार के साथ बेहतर उत्पादन मिल सके।

