रिपोर्ट - मिठालाल गुर्जर
"कालो घणो रूपालो रे गढ़बोरिया वालों रे के भजनों पर थीरके भक्त, दिखा आस्था का सैलाब , मंदिर पर विद्युत सज्जा के साथ रंग-बिरंगे फूलों से भक्तों ने सजाया ठाकुर जी का दरबार
राजसमंद जिले के चारभुजा गढबोर में रविवार छुट्टी का दिन होने से श्रद्धालु भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा । रविवार को कस्बे में चारों तरफ श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आ रहे थे वही चारभुजा धर्म नगरी मैं बड़ी-बड़ी धर्मशालाएं पूर्व से ही बुकिंग हो गई थी साथी आसपास के गेस्ट हाउस में भी श्रद्धालुओं का ठहरा देखने को मिला जहां आए श्रद्धालुओं द्वारा शनिवार को मंदिर पर विद्युत सजग भी करवाई गई वहीं रविवार को भक्तों ने निज मंदिर से बाहर तक ठाकुर जी के दरबार को दुल्हन की तरह रंग-बिरंगे फूलों की माला से सुशोभित करवाया गया साथ ही मंदिर पर विद्युत सज्जा भी करवाई गई।जहां लाखों की तादात में रविवार की छुट्टी पर श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना के साथ ठाकुर जी के दरबार में पहुंचकर माथा टेका ।मेवाड़ ,मारवाड़ एवं वागड़ क्षेत्र से कई श्रद्धालुओ के अलावा , आम की मादडी उदयपुर, कनेरा नीमच, निंबाड़ा भीलवाड़ा, चित्तौड़,जावद नीमच महेंद्रगढ़ सहित साहित्य श्रद्धालु अपने परिवार के साथ हजारों की तादात में श्रद्धालु भक्तों को दर्शनार्थ लेकर आए जहां सभी ने पूर्ण आस्था विश्वास के साथ भगवान के चौखट पर मत्था टेक कर सुख समृद्धि एवं आरोग्य की कामना की । यह चारभुजा नाथ मंदिर पांडव कालीन स्थापित मंदिर है जो सदियों पुराना एवं पूजा पद्धति वही पुरानी चल रही है भगवान चारभुजा विष्णु के दिव्या अवतार स्वरूप माने जाते हैं जिनके चारों हाथों में शंख चक्र गधा पदम सुशोभित है जो धर्म शक्ति संरक्षक और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यहां की ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मनोकामना लेकर पहुंचता है उनकी भगवान विष्णु चतुर्भुज नाथ जीवन में सुख शांति एवं धन धान्य से उसका मार्ग प्रशस्त कर देते हैं। ऐसी ही मान्यता के साथ हर दिन यहां भक्तों का ताता लगा रहता है। जहां भगवान चारों हाथ से रहे हैं। वही यह आए श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के दरबार को नाना प्रकार के फूलों की माला उसे सुशोभित कर दरबार को सजाया गया वही भक्तों ने मनोरथ करवाने जाते समय रास्तों में जगह-जगह पर जूस प्रसाद सहित अन्य प्रसाद के रूप में सामग्रियां बांटी गई जहां भक्तों का मन प्रफुल्लित हो उठा वही मंदिर के बाद बंद बाजू की धुन पर भक्तों ने खूब नाचने का लुक तो उठाया। वही कस्बे के पुजारी धर्मशाला गोवर्धन धर्मशाला, महा श्रवण, महेश्वरी भवन सहित आसपास की होटल गेस्ट हाउस में रुके बाहर से आए श्रद्धालु मैं महाप्रसादी में शारीरिक होकर भगवान का प्रसाद अर्पण किया। वही महाप्रसादियों की दिन भर चर्चा रही।



