एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौतों पर प्रशासन का स्पष्टीकरण, जांच समिति गठित :
भीलवाड़ा : महात्मा गांधी चिकित्सालय में हाल ही में हुई प्रसूताओं एवं महिला मरीजों की मौतों को लेकर सामने आई खबरों के बाद जिला प्रशासन ने तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट की है। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने शनिवार सुबह एमजी अस्पताल का औचक निरीक्षण कर पूरे मामले की जानकारी ली और अस्पताल प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है।
अस्पताल के पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि जिन पांच महिलाओं की मौत हुई, उनकी मृत्यु अलग-अलग गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के कारण हुई है। इनमें फोरी देवी प्रसूता नहीं थीं, बल्कि बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती थीं और उनकी मृत्यु हृदयाघात से हुई। वहीं शिमला गुर्जर को गंभीर हालत में गुलाबपुरा से रेफर किया गया था, उनका अस्पताल में कोई ऑपरेशन नहीं हुआ।
पीएमओ के अनुसार अन्य तीन मरीजों की मौत पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, HELLP सिंड्रोम, एक्लेम्प्सिया तथा प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव जैसी गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के कारण हुई। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी मरीज की मृत्यु ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण के कारण नहीं हुई।
प्रशासन ने बताया कि ऑपरेशन थियेटर नंबर-2 में नियमित माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के दौरान संक्रमण मिलने पर 29 जून से ही उसे बंद कर दिया गया था और तब से उसमें कोई ऑपरेशन नहीं किया गया। अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार नियमित फ्यूमिगेशन, स्टेरिलाइजेशन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया जारी है।
अस्पताल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन के लिए केवल पांच स्टेराइल सेट होने की खबर गलत है। वर्तमान में अस्पताल में 22 स्टेराइल सेट उपलब्ध हैं और प्रतिदिन औसतन 15 से 20 सीजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।
जिला कलेक्टर ने कहा कि जांच समिति पूरे मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और संक्रमण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

