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आदेश जारी हुए नौ दिन नहीं, बल्कि कई दिन बीत गए—फिर भी कान्हीवाड़ा थाने में जमे निरीक्षक संतोष पन्द्रे! क्या डीजीपी के आदेश से ऊपर है जिला पुलिस प्रशासन? : NN81


 

आदेश जारी हुए नौ दिन नहीं, बल्कि कई दिन बीत गए—फिर भी कान्हीवाड़ा थाने में जमे निरीक्षक संतोष पन्द्रे! क्या डीजीपी के आदेश से ऊपर है जिला पुलिस प्रशासन?

पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश, भोपाल द्वारा पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के हस्ताक्षर से जारी आदेश क्रमांक पु.मु./3/कार्मिक/1/879/2026, दिनांक 23 जून 2026 के अनुसार कान्हीवाड़ा थाने में पदस्थ निरीक्षक संतोष कुमार पन्द्रे का स्थानांतरण पीटीएस पचमढ़ी किया जा चुका है। स्थानांतरण नीति एवं शासन के प्रावधानों के अनुसार संबंधित अधिकारी को समयावधि में नवीन पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना तथा जिला स्तर से तत्काल कार्यमुक्त किया जाना अपेक्षित है, किंतु आश्चर्यजनक रूप से निरीक्षक पन्द्रे अब भी कान्हीवाड़ा थाने में जमे हुए हैं। यदि यह तथ्य सही है कि उन्हें अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी वैध आदेश की अवहेलना तथा स्थानांतरण नीति की भावना के प्रतिकूल माना जा सकता है। ऐसे में यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि आखिर किस विशेष कारण या संभावित लाभ के चलते उन्हें अब तक रिलीव नहीं किया गया? यदि जिला पुलिस अधीक्षक, सिवनी द्वारा जानबूझकर कार्यमुक्ति नहीं दी जा रही है, तो यह मामला पुलिस मुख्यालय के आदेशों के अनुपालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है और इसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक प्रतीत होती है।

कान्हीवाड़ा थाना बना अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना? शराब माफिया बेलगाम, चोर बेखौफ, जुआ-सट्टा चरम पर, फिर भी पुलिस मौन: 

सिवनी जिले के कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि मोहनीश बैस, अजय मरकाम और कृपाल सिंह टेकाम जैसे प्रभावी थाना प्रभारियों के बाद आज तक कोई ऐसा थाना प्रभारी नहीं मिला, जिसने अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया हो। ताज़ा चोरी के आवेदन में पीड़िता ने घर का ताला तोड़कर लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण एवं नकदी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई है, जबकि क्षेत्र में इससे पूर्व हुई अनेक चोरियों का भी अब तक खुलासा नहीं हो सका। दूसरी ओर गांव-गांव तक अवैध शराब की तस्करी खुलेआम जारी है, 52 ताश के पत्तों पर सट्टा-जुआ प्रतिदिन संचालित होने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन पुलिस की कार्यवाही नज़र नहीं आती। सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब सिवनी पुलिस मुख्यालय में छह योग्य निरीक्षक पदस्थ हैं और उन्हें अब तक किसी थाने का प्रभार नहीं सौंपा गया है, तो अपराध प्रभावित क्षेत्रों में उनकी सेवाओं का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? पुलिस अधिनियम, 1861, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 तथा मध्यप्रदेश पुलिस रेगुलेशन का मूल उद्देश्य अपराधों की रोकथाम, त्वरित विवेचना और जनता में सुरक्षा का विश्वास कायम करना है। यदि कान्हीवाड़ा में लगातार बढ़ते अपराधों के बावजूद पुलिस व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही है, तो पुलिस अधीक्षक को प्रशासनिक कसावट लाते हुए योग्य निरीक्षकों की तत्काल पदस्थापना कर क्षेत्रवासियों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए, अन्यथा अपराधियों के बढ़ते हौसले पुलिस व्यवस्था पर जनता के विश्वास को और कमजोर करेंगे।

लाखों की चोरी, फिर भी FIR नहीं! कान्हीवाड़ा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, आखिर किसे बचाया जा रहा है?

कान्हीवाड़ा थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था लगातार कठघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। ताज़ा मामले में एक पीड़ित परिवार ने घर का ताला तोड़कर सोने-चांदी के आभूषण, नगदी एवं कीमती सामान चोरी होने का लिखित आवेदन थाना पुलिस को सौंपा, लेकिन गंभीर अपराध होने के बावजूद अब तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के अनुरूप प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने केवल कच्चा आवेदन लेकर मामले को टाल दिया, जिससे थाना प्रभारी संतोष की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश शासन के ऐतिहासिक निर्णय में भी स्पष्ट किया जा चुका है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है, न कि पुलिस के विवेक पर निर्भर। इसके बावजूद कान्हीवाड़ा क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं, एक भी बड़ी चोरी का खुलासा नहीं हुआ, अवैध शराब, सट्टा और जुआ खुलेआम संचालित होने के आरोप लग रहे हैं, जबकि पुलिस की निष्क्रियता अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है। यदि इतनी बड़ी चोरी में भी FIR दर्ज नहीं होती, तो यह केवल प्रशासनिक ढिलाई नहीं बल्कि पीड़ित को न्याय से वंचित करने जैसी गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक सिवनी इस मामले में जवाबदेही तय कर कान्हीवाड़ा थाना पुलिस पर कार्रवाई करते हैं या फिर अपराधियों को इसी तरह खुली छूट मिलती रहेगी।

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