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वर्षों बाद गोविंद सागर बांध पर लौटे सारस, 10 जोड़ों ने बिखेरी प्राकृतिक सुंदरता..............NN81



(सहाड़ा) = क्षेत्र के महेंद्रगढ़ स्थित गोविंद सागर बांध पर सोमवार को वर्षों बाद सारस पक्षियों के 10 जोड़े एक साथ दिखाई देने से ग्रामीणों और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह का माहौल बन गया। बांध पर पानी के बीच विचरण करते और उड़ान भरते सारसों का मनमोहक दृश्य दिनभर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।


सुबह से ही सारस पक्षियों की मौजूदगी की सूचना फैलते ही आसपास के ग्रामीण बांध पर पहुंचने लगे। लोगों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाकर इस दुर्लभ दृश्य को कैद किया। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय बाद क्षेत्र में सारस पक्षियों की इतनी बड़ी संख्या देखने को मिली है।


बुजुर्गों का कहना है कि पहले भी कभी-कभार सारस पक्षी यहां दिखाई देते थे, लेकिन एक साथ 10 जोड़ों का आगमन बेहद खास और यादगार घटना है। भारतीय संस्कृति में सारस को प्रेम, निष्ठा, खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण ग्रामीण इनके आगमन को शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं।


प्रकृति प्रेमियों के अनुसार गोविंद सागर बांध में पर्याप्त जलभराव, शांत वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र पक्षियों के लिए अनुकूल आवास बनता जा रहा है। सारसों की मौजूदगी यहां के बेहतर पर्यावरणीय संतुलन का संकेत मानी जा रही है।


स्थानीय लोगों ने प्रशासन एवं वन विभाग से बांध क्षेत्र में पक्षी संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने की मांग की है, ताकि भविष्य में भी ऐसे दुर्लभ और सुंदर पक्षियों का आगमन बना रहे। सारसों के इस समूह ने न केवल बांध की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाए हैं, बल्कि लोगों में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है।


ग्रामीणों का मानना है कि वर्षों बाद लौटे सारस क्षेत्र के लिए खुशहाली और समृद्धि का संदेश लेकर आए हैं। पूरे दिन बांध पर पहुंचे लोगों की नजर इन खूबसूरत पक्षियों पर टिकी रही और हर कोई इस अद्भुत नजारे की सराहना करता नजर आया।

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