विकास संवाद संस्थान द्वारा 'चाइल्ड राइट्स एंड यू' (CRY) के सहयोग से पोहरी ब्लॉक के 20 गाँवों में 'समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन परियोजना' का संचालन किया जा रहा है. बच्चों के स्वास्थ्य, जीवन और उनके बेहतर पोषण के अधिकार को सुनिश्चित करने वाली इसी परियोजना के तहत ग्राम टपरपारा में 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित कुल 40 लोगों ने भाग लिया और अपने समुदाय को नशा व कुपोषण से मुक्त कराने का सामूहिक संकल्प लिया.
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर गहराई से चर्चा की गई कि परिवार में तंबाकू, बीड़ी, गुटका और शराब का सेवन किस तरह बच्चों के पोषण को प्रभावित करता है और उन्हें कुपोषण की ओर धकेलता है. ग्रामीणों को जागरूक करते हुए बताया गया कि तंबाकू का लगातार सेवन करने से कैंसर, मुंह में छाले, भूख कम लगना और लार ग्रंथियों का नष्ट होना जैसी गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं. इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति तंबाकू छोड़ता है, तो उसके शरीर में चमत्कारी सुधार होते हैं; जैसे महज 20 मिनट में रक्तचाप सामान्य होने लगता है, 2 सप्ताह से 3 महीने के भीतर फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर हो जाती है और 1 वर्ष में हृदय रोग का खतरा आधा रह जाता है.
चर्चा के दौरान स्थानीय निवासी बीरबल आदिवासी ने समुदाय के भीतर की एक कड़वी सच्चाई को सामने रखते हुए बताया कि सहरिया आदिवासी समाज में गुटका और शराब का प्रचलन बहुत ज्यादा है. लोग बचपन से ही इन नशीली चीजों का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिसके कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बहुत कम हो जाती है. यही वजह है कि आज समाज में लोगों की औसत उम्र चिंताजनक रूप से घटकर महज 40 से 50 वर्ष रह गई है. शरीर कमजोर होने के कारण टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) जैसी बीमारियां इस समुदाय को आसानी से घेर लेती हैं और फिर मरीजों को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है. उन्होंने सभी से अपील की कि यदि हमें अपनी उम्र बढ़ानी है और बच्चों को कुपोषण से बचाना है, तो तंबाकू, बीड़ी, गुटका और शराब का पूरी तरह त्याग करना होगा और अपने खान-पान व पोषण पर विशेष ध्यान देना होगा.
इस मौके पर परियोजना के कमेटी मोबिलाइजर रामकेश आदिवासी ने समुदाय को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि हमें अपने गाँव और समाज की स्थिति में सुधार लाना है, तो इसकी शुरुआत सबसे पहले अपने खुद के घर और अपने आप से करनी होगी. जब हम खुद में सुधार करेंगे, तभी धीरे-धीरे हम पूरे समुदाय को इस लत से मुक्त कर पाएंगे.
विकास संवाद के जिला समन्वयक अजय यादव ने कार्यक्रम के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) के सहयोग से चल रही इस कुपोषण प्रबंधन परियोजना का लक्ष्य केवल बच्चों का उपचार करना नहीं है, बल्कि एक ऐसे नशा मुक्त समुदाय की परिकल्पना करना है जहाँ बच्चों को एक स्वस्थ और सुरक्षित बचपन मिल सके. जब परिवार नशे से मुक्त होगा, तभी वह अपनी मेहनत की कमाई को बीमारी और व्यसन में बर्बाद करने के बजाय बच्चों की शिक्षा और अच्छे खान-पान पर खर्च कर पाएगा.
नितिन राजपूत
