इंजीनियर हामिद” नेटवर्क ध्वस्त: बकरीद पर 48 गौवंश की कुर्बानी* *के जरिए सिवनी को* *सांप्रदायिक आग में झोंकने की* *साजिश नाकाम, पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के* *नेतृत्व में सिवनी पुलिस बनी जीवित इंटेलिजेंस विभाग !
नागपुर में बैठकर सिवनी के कुछ मौलाना और अन्य लोगों के साथ मिलकर शहर का माहौल बिगाड़ने, धार्मिक भावनाएं भड़काने और बकरीद पर 48 गौवंश की कुर्बानी के जरिए सिवनी को पुनः सांप्रदायिकता की आग में झोंकने की कथित साजिश आखिरकार सिवनी पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दी। पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने मास्टरमाइंड बताए जा रहे “इंजीनियर हामिद” को नागपुर से दबोचकर पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। मोबाइल, फोन-पे हिस्ट्री और व्हाट्सएप डाटा ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। सवाल अब भी वही है कि आखिर पहले का खुफिया तंत्र क्या कर रहा था ? कोतवाली का नेटवर्क अब तक सोया क्यों था ? हालांकि नवागत एसपी कृष्ण लालचंदानी के आने के बाद जिस तेज़ी और आक्रामक शैली में गौतस्करी, गौकशी और सांप्रदायिक साजिशों पर कार्रवाई हो रही है, उससे साफ दिखने लगा है कि सिवनी पुलिस अब केवल पुलिस नहीं बल्कि जीवित इंटेलिजेंस विभाग की तरह काम कर रही है। पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि शहर का माहौल बिगाड़ने, गौवंश तस्करी या धार्मिक उन्माद फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
“ *जीरो टॉलरेंस वाले कप्तान”: गांव-गांव पहुंच रहे एसपी कृष्ण लालचंदानी, सिवनी में अपराधियों से ज्यादा अब सिस्टम में बैठे सुस्त लोगों की बढ़ी धड़कनें !*
सिवनी जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी अपनी नियुक्ति के महज 15 दिनों में ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी कार्यशैली सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं बल्कि सीधे ग्राउंड जीरो से संचालित होती है। बकरीद जैसे संवेदनशील त्योहार से पहले गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से संवाद करना, शांति समिति की बैठकों में अंतिम छोर के व्यक्ति की बात सुनना और पुलिस व्यवस्था को खुद मैदान में उतरकर मॉनिटर करना उनकी सादगी, सक्रियता और जीरो टॉलरेंस नीति को सबसे अलग बनाता है। यही वजह है कि जहां आम जनता में भरोसा बढ़ रहा है वहीं अपराधियों, गौतस्करों, सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वालों और सिस्टम में छिपे सुस्त तंत्र की बेचैनी भी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। अगर यही कार्यशैली जारी रही तो आने वाले समय में सिवनी पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था संभालने वाली फोर्स नहीं बल्कि जनता के विश्वास की सबसे मजबूत दीवार बनकर उभरेगी।
“ *ट्राइबल बेल्ट बना अपराधियों का सेफ ज़ोन ?” घँसौर, धनोरा,* *आदेगांव और धूमा थानों* *पर उठे सवाल, शराब* *माफिया -गौतस्करी-जुआ सट्टा पर लगाम नहीं, पुलिस व्यवस्था में बड़े* *बदलाव की मांग तेज !*
सिवनी जिले के ट्राइबल बेल्ट में शामिल घँसौर, धनोरा, आदेगांव और धूमा जैसे थानों की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में दिखाई देने लगी है, जहां स्थानीय स्तर पर शराब माफिया, गौतस्करी, जुआ-सट्टा और अन्य अवैध कारोबार लंबे समय से खुलेआम फल-फूल रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों के बीच चर्चा है कि कुछ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही इलाके में जमे हुए हैं, जिन पर स्थानीय अपराधियों से सांठगांठ के आरोप भी लगते रहे हैं, जबकि कई थाना प्रभारी पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। चूंकि ये क्षेत्र आदिवासी और दूरस्थ इलाके हैं, इसलिए यहां के अधिकांश लोग अपने हक और अधिकारों के लिए खुलकर आवाज नहीं उठा पाते, जिसका फायदा कथित तौर पर अपराधी नेटवर्क उठा रहे हैं। अब आमजन के बीच यह मांग तेज होती जा रही है कि पुलिस अधीक्षक श्री कृष्ण लालचंदानी इन संवेदनशील थानों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा कर कड़े प्रशासनिक बदलाव और स्थानांतरण जैसी कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि ट्राइबल क्षेत्र में कानून का वास्तविक राज स्थापित हो सके।
