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ज्ञान भारतम पहल में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर को मिली पहचान.........NN81

भारत सरकार की ज्ञान भारतम पहल के अंतर्गत 16 मार्च 2026 को देशभर में स्थित पांडुलिपियों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण के लिए ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण आयोजित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य देश में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का मानचित्रण कर उनके संरक्षण, अनुसंधान एवं डिजिटलीकरण के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।

          इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम कोलर में संरक्षित दुर्लभ ताड़ पत्र पुराणों ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है। स्वतंत्रता सेनानी परिवार द्वारा वर्षों से सुरक्षित रखी गई ये पांडुलिपियां प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जा रही हैं।

          इन दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानी श्री चिंतु देहारी के पोते दलवत देहारी को 16 मई 2026 को जिला कार्यालय के सभा कक्ष में सम्मानित किया गया। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई द्वारा उन्हें शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।

             संरक्षित प्रमुख ताड़ पत्र पुराणों में नामरत्न गीता, देवी भागवत, काँगा बोली, लक्ष्मी पुराण, कृपा सिंधु तथा पांजी संगनेठी भागवत पुराण शामिल हैं। इन ग्रंथों में धार्मिक विषयों के साथ-साथ उस समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है।

          विशेषज्ञों का मानना है कि इन पांडुलिपियों का संरक्षण और अध्ययन छत्तीसगढ़ के इतिहास, आदिवासी समाज की बौद्धिक परंपरा और स्थानीय ज्ञान प्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह पहल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस अवसर पर राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे |

संवाददाता खुमेश यादव 


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