मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के लिम्बोदा गांव में दलित समाज के एक परिवार को घोड़ी पर बैठकर डीजे के साथ बिंदोली निकालने से रोकने का मामला सामने आया है। आजादी के 78 साल बाद भी सामाजिक भेदभाव और जातिवादी मानसिकता को लेकर उठे इस मुद्दे ने प्रशासन और सरकार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव में दबंग और सामंतवादी मानसिकता के लोगों द्वारा उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। इतना ही नहीं, परिवार के सामाजिक बहिष्कार की कोशिश करते हुए हुक्का-पानी बंद करने और घरों पर ताले लगाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।
मामले को लेकर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की। भीम आर्मी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को बराबरी और सम्मान का अधिकार देता है, लेकिन आज भी दलित समाज को अपने मूल अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि लिम्बोदा गांव भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर का गांव बताया जा रहा है। इसके बावजूद पीड़ित परिवार को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल पा रहा है।
भीम आर्मी ने मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राजगढ़ कलेक्टर और पुलिस प्रशासन से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या राजगढ़ में दलित समाज का व्यक्ति घोड़ी पर नहीं बैठ सकता? क्या संविधान सिर्फ किताबों तक सीमित रह गया है?
संगठन ने चेतावनी दी है कि बहन लक्ष्मी और छोटे प्रकाश की बिंदोली पूरे सम्मान और धूमधाम से निकाली जाएगी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
पवन अहिरवाल की रिपोर्ट
