गोवा सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर प्रसारित किए जा रहे कथित “₹1000 करोड़ घोटाले” से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह भ्रामक, निराधार और तथ्यों से परे बताया है।
विभाग ने स्पष्ट किया कि जिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, वे केवल Class I-AA (Super) श्रेणी के अंतर्गत एक ठेकेदार के सूचीकरण (Enlistment) के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों के नियमित सत्यापन से संबंधित हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह एक सामान्य प्रशासनिक एवं प्रक्रियागत कार्यवाही है, जिसकी जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार की जा रही है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित ठेकेदार को उक्त श्रेणी में सूचीबद्ध किए जाने के बाद किसी भी प्रकार का कार्यादेश (Work Order) जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इस प्रक्रियागत मामले को तथाकथित “₹1000 करोड़ घोटाले” से जोड़ना पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है।
विभाग ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कुछ व्यक्तियों एवं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा बिना आधिकारिक तथ्यों की पुष्टि किए सनसनीखेज और अपुष्ट दावे प्रसारित किए जा रहे जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है तथा संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
लोक निर्माण विभाग ने दोहराया कि गोवा में ठेकेदार सूचीकरण एवं निविदा मूल्यांकन की प्रक्रिया एक पारदर्शी, बहु-स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच प्रणाली के अंतर्गत संचालित होती है। विभाग को प्राप्त होने वाली प्रत्येक शिकायत की जांच नियमानुसार और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की जाती है।
विभाग ने पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जनता को गुमराह करने और विभाग व उसके अधिकारियों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से फैलाए जा रहे भ्रामक एवं मानहानिकारक प्रचार के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
संवाददाता राहुल सरपाते की रिपोर्ट
