पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों को नज़रअंदाज़ करते हुए समाज के सामने एक नया आदर्श रखा
वर्धा ज़िले में रहने वाले युवा टीचर विशाल सुरकर और पल्लवी ने समाज के सामने एक नया आदर्श रखा है..
सभी रीति-रिवाजों और परंपराओं को किनारे रखते हुए, उन्होंने सत्यशोधक समाज स्टाइल में शादी की है। सत्यशोधक समाज 19वीं सदी का एक बड़ा समाज सुधार संगठन था, जिसे ज्योतिराव फुले ने 24 सितंबर, 1873 को पुणे, महाराष्ट्र में शुरू किया था। इस संगठन का मकसद शूद्रों, अति-शूद्रों (दलितों) और महिलाओं को जातिगत भेदभाव और ब्राह्मणवादी दबदबे से आज़ाद कराना था, साथ ही शिक्षा, सामाजिक बराबरी और विधवा विवाह को बढ़ावा देना था। सत्यशोधक समुदाय की खास बातें:
भाषा: ज्योतिराव फुले, जिन्हें अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले का पूरा सपोर्ट था, जिन्होंने महिलाओं की शिक्षा को आगे बढ़ाया।
सत्यशोधक की परिभाषा: एक ऐसी शादी जिसमें जोड़े ने बराबरी, शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों का सपोर्ट करने की कसम खाई हो।
गांव और आस-पास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग शादी में शामिल हुए।
वर्धा ते सतीश काळे की रिपोर्ट
