भीलवाड़ा = मेडिसिटी ग्राउंड में चल रही सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन गुरुवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पांडाल छोटा पड़ गया। करीब साढ़े चार लाख वर्ग फीट में फैले डोम और पांडाल में जगह नहीं मिलने पर श्रद्धालु बाहर ही जहां स्थान मिला, वहीं बैठकर कथा का श्रवण करते नजर आए।
प्रख्यात कथावाचक ‘कुबेर भंडारी’ पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से कथा सुनने के लिए दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। कथा स्थल ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।
कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि हर परिवार और समाज में एक ‘मंथरा’ होती है, जो लोगों के कानों में जहर घोलकर रिश्तों में दरार डालती है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी बातों पर ध्यान दिया जाए तो परिवार टूट जाता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
उन्होंने शिव महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसे लोहे को लोहा काटता है, वैसे ही नकारात्मकता को शिव कथा ही दूर कर सकती है। जीवन में सुख-दुख की स्थिति में समभाव बनाए रखना ही सच्चा धर्म है।
शिव भक्ति से बदलती है तकदीर
पंडित मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन जीवन और भाग्य बदलने की शक्ति रखते हैं। यदि वहां जाना संभव न हो तो घर के समीप शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भी भगवान प्रसन्न होते हैं। उन्होंने अहंकार त्यागकर भक्ति करने का संदेश देते हुए कहा कि मन की शुद्धता के बिना शिव प्राप्ति संभव नहीं है।
पत्नी अर्धांगिनी का महत्व बताया
कथा में उन्होंने पारिवारिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्नी को कभी कम नहीं आंकना चाहिए। वह पति के जीवन का आधा से अधिक भार वहन करती है, इसलिए उसे अर्धांगिनी कहा जाता है।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान ‘वो काशी रहने वाला बाबा भोलेनाथ चाहिए’ जैसे भजनों पर हजारों श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, भक्ति में झूमती नजर आईं।
श्रद्धालुओं को मंच पर बुलाया
कथा के दौरान कुछ श्रद्धालुओं के पत्र पढ़कर उन्हें मंच पर बुलाया गया और शिव भक्ति से समस्याओं के समाधान के अनुभव साझा किए गए।
आयोजन समिति की सेवा भावना
देशभर से आए श्रद्धालुओं के लिए आयोजन समिति द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। देर रात तक समिति के पदाधिकारी पांडाल में पहुंचकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लेते रहे और समस्याओं का समाधान किया।
