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निरंतर प्रयासों से आया ग्राम आमई में स्‍वच्‍छता में बदलाव - NN81


मध्यप्रदेश शिवपुरी से नितिन राजपूत शिवपुरी ब्यूरो रिपोर्टर 

पोहरी, शिवपुरी |

आदिवासी बाहुल्य ग्राम आमई में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति आया बदलाव रातों-रात नहीं आई, बल्कि यह एक वर्ष के निरंतर प्रयासों का सुखद परिणाम है। विकास संवाद समिति द्वारा संचालित 'समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन परियोजना' के अंतर्गत, ग्रामीणों ने पिछले एक वर्ष से स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। ग्राम विकास समूह की सक्रिय वॉलिंटियर ग्‍यासो बाई के नेतृत्व में समुदाय ने यह साबित कर दिया है कि धैर्य और निरंतरता से किसी भी बड़े बदलाव को संभव बनाया जा सकता है।

एक वर्ष का संघर्ष और व्यवहार में बदलाव

पिछले 12 महीनों से लगातार चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय ने स्वच्छता को मात्र सफाई नहीं, बल्कि एक आदत के रूप में अपनाया है। शुरुआत में चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, ग्‍यासो बाई ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने विकास समूह के माध्यम से गाँव के हर घर में जाकर संवाद किया, स्वच्छता के लाभ समझाए और धीरे-धीरे ग्रामीणों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया।

कुपोषण प्रबंधन और सामुदायिक स्वच्छता का जुड़ाव

विकास संवाद समिति का मानना है कि कुपोषण मुक्त समाज के लिए बेहतर खान-पान के साथ-साथ स्वच्छ वातावरण का होना अनिवार्य है। इसी कड़ी में, ग्‍यासो बाई ने ग्रामीणों को यह समझाया कि कैसे गंदा परिवेश बच्चों में संक्रमण और कुपोषण को बढ़ावा देता है। आज स्थिति यह है कि गाँव के बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी स्वेच्छा से स्वच्छता अभियान में भागीदारी कर रहे हैं। कचरा प्रबंधन हो या सार्वजनिक स्थलों की सफाई, अब ग्रामीणों को अलग से कहने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

नेतृत्व और सामूहिक संकल्प

इस पूरे सफर के बारे में वॉलिंटियर ग्‍यासो बाई बताती हैं, "एक साल पहले स्वच्छता के प्रति लोगों का नजरिया अलग था, लेकिन आज यह उनके व्यवहार का हिस्सा बन गया है। हमने हर महीने मीटिंग की, जागरूकता रैलियाँ निकालीं और समूह के माध्यम से एक-दूसरे को प्रेरित किया। यह बदलाव एक व्यक्ति का नहीं, पूरे आमई ग्राम के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

विकास संवाद समिति के इस प्रयास और ग्‍यासो बाई के नेतृत्व ने ग्राम आमई को आसपास के अन्य गाँवों के लिए एक 'स्वच्छता मॉडल' के रूप में स्थापित कर दिया है। यह पहल न केवल कुपोषण के विरुद्ध एक मजबूत सुरक्षा कवच है, बल्कि एक जागरूक और स्वस्थ भविष्य की ओर एक बड़ा कदम भी है।

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