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खनियाधाना में स्कूली बच्चों को“45 दिन – 45 पहाड़े” अभियान के साथ ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू ..NN81



विद्यालय  में छात्रों को वितरित की गई बिट्टू की डायरी

खनियाधाना। जिला शिक्षा केन्द्र शिवपुरी के जिला परियोजना समन्वयक श्री दफेदार सिंह सिकरवार के निर्देशानुसार ग्रीष्म अवकाश के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से खनियाधाना विकासखंड में विशेष गृहकार्य योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत अब “45 दिन – 45 पहाड़े” अभियान भी संचालित किया जाएगा, जिससे बच्चों की गणितीय दक्षता को मजबूत किया जा सके।

बीआरसी संजय भदोरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीष्म अवकाश के 45 दिनों में विद्यार्थियों को प्रतिदिन एक पहाड़ा याद करने और लिखने का लक्ष्य दिया गया है। इस प्रकार 45 दिनों में 45 तक के पहाड़े बच्चों को कंठस्थ कराए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा विद्यार्थियों को एक डायरी  वितरित की गई है या छात्रों से बनवाई गई है जिसका नाम होगा बिट्टू की डायरी में नियमित गृहकार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक स्तर के बच्चों को 25 तक एवं माध्यमिक स्तर के बच्चों को 40 तक के पहाड़ों का अभ्यास, हिंदी एवं अंग्रेजी सुलेख, अंग्रेजी शब्दों के अर्थ याद करने का कार्य दिया जाएगा। ग्रीष्म अवकाश के बाद या बिट्टू की डायरी छात्र विद्यालय में जमा करेंगे और इसके उपरांत है  अच्छी डायरी को अवलोकन के लिए जिला शिक्षा केंद्र को भेजा जाएगा

गृहकार्य में भाषा विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को अक्षर, वर्ण, मात्राएं, शब्द पहचान एवं लेखन का अभ्यास कराया जाएगा, जबकि माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को अनेकार्थी शब्द, विलोम, पर्यायवाची, लोकोक्तियां एवं मुहावरे लिखने व याद करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण तिथियों, राष्ट्रीय दिवसों एवं महापुरुषों के जीवन परिचय, स्थानीय पर्यावरण, सांस्कृतिक धरोहर और सामान्य ज्ञान से संबंधित जानकारी भी गृहकार्य में शामिल करने को कहा गया है।

बीआरसी संजय भदोरिया ने आगे बताया कि ओलंपियाड, NMMS एवं नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के पूर्व वर्षों के प्रश्नों को भी गृहकार्य में शामिल किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मजबूत हो सके।

उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे इस अभियान को गंभीरता से लागू करें, ताकि ग्रीष्म अवकाश के दौरान भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रहे और उनके शैक्षणिक स्तर में गुणात्मक सुधार हो सके।


पुनीत शाक्य रिपोर्टर की ख़ास रिपोर्ट 

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