खामगांव जिला बुलढ़ाणा महाराष्ट्र
सातपुड़ा की गोद में बसे वासाडी और अंबाबरवा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में पिछले 3-4 दिनों से भीषण आग लगी हुई है। सातपुड़ा पहाड़ों की रेंज में बसे इस घने जंगल में लगी आग ने दुर्लभ वन संपदा और वन्यजीवों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है, और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट आग बुझाने की पूरी कोशिश कर रहा है।
कभी बेहद दुर्गम और खतरनाक माना जाने वाला यह सातपुड़ा का जंगल अब पेड़ों की कटाई और बार-बार लगने वाली आग की वजह से खतरे में है। सोनाला फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर अजय भावने, फॉरेस्ट गार्ड, और फॉरेस्ट कमेटी के सदस्य पिछले कुछ दिनों से लगी इस आग को बुझाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। हालांकि, आग की तीव्रता को देखते हुए, इस पर अभी पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। इस जंगल में बाघ, तेंदुआ, भालू, नील गाय, हिरण, भेड़िये और दुर्लभ उड़ने वाली गिलहरी जैसे जानवर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। यह अजगर और कई तरह के सांपों का भी बसेरा है। यह आग इन बेजुबान जानवरों के रहने की जगह को खत्म कर रही है और दवा वाले पौधों और कीमती पेड़ों को बहुत नुकसान पहुंचा रही है। कुछ दिन पहले, इलाके में एक तेंदुआ देखा गया था, और डर है कि इस आग से उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। स्थानीय स्तर पर इस बात की ज़ोरदार चर्चा है कि यह आग कुदरती नहीं बल्कि इंसानों की लगाई हुई है। पिछले साल, पुलिस ने जलगांव जामोद तालुका के भिंगारा इलाके में बड़े पैमाने पर गांजे की खेती पकड़ी थी। आज भी, लोगों में यह चर्चा है कि जंगल के अंदरूनी हिस्सों में गांजे की गैर-कानूनी खेती की जा रही है। यह भी शक है कि सलाई और धावड़ा गोंद की तस्करी के लिए जानबूझकर आग लगाई जा रही है।जंगल में मचान सिर्फ़ सजावट का सामान बनता जा रहा है, और लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार अब जंगल की आग पर काबू पाने के लिए हाई-पावर ड्रोन कैमरे और छोटे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करे। रात में ड्रोन से निगरानी करने से आग लगने की असली वजह मालुम होसकेगी
मोहम्मद फारूक खामगांव
