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कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अंतर्गत नारायणपुर में एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न - NN81



लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़ 

संवाददाता खुमेश यादव 


नारायणपुर - नारायणपुर जिले में कुपोषण की समस्या को प्रभावी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा संचालित कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत बस्तर एवं सरगुजा संभाग के आठ जिलों में 15 दिसंबर 2025 से विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। बस्तर संभाग के बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर एवं दंतेवाड़ा जिलों में इस अभियान को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है, ताकि कुपोषण से प्रभावित बच्चों और माताओं की बेहतर देखभाल एवं निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

अभियान के तहत प्रत्येक सुपोषण दूत को 10 बच्चों तथा प्रत्येक महिला स्व-सहायता समूह को 25 बच्चों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुपोषण दूत एवं स्व-सहायता समूह की महिलाएं बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए परिवारों को संतुलित आहार, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवहारों के प्रति जागरूक करेंगी। राज्य शासन द्वारा प्रत्येक कुपोषित बच्चे के लिए 1800 रुपये मानदेय निर्धारित किया गया है। कुपोषित बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की निगरानी छः माह तक की जाएगी। बच्चों के चिन्हांकन के पश्चात 10 प्रतिशत राशि प्रारंभ में दी जाएगी तथा छः माह तक नियमित देखभाल और विभागीय मूल्यांकन के बाद बच्चा सामान्य श्रेणी में आने पर शेष 90 प्रतिशत राशि सुपोषण दूत एवं महिला स्व-सहायता समूह को प्रदान की जाएगी।

इसी क्रम में 18 एवं 19 मार्च 2026 को जिला नारायणपुर में सुपोषण दूतों एवं महिला स्व-सहायता समूहों के प्रतिभागियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण कलेक्टर श्रीमति नम्रता जैन (आईएएस) के नेतृत्व तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आगामी छः माह में किए जाने वाले कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना से अवगत कराया गया। साथ ही गंभीर कुपोषित (SAM) एवं मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान, देखभाल एवं पोषण प्रबंधन, घर-घर निगरानी की प्रक्रिया तथा एनीमिया से पीड़ित माताओं की देखरेख के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त परिवारों में पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने, संतुलित आहार को बढ़ावा देने तथा सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के संभागीय सलाहकार श्री जगत मल्होत्रा के दिशा-निर्देश में किया गया। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्यरत समस्त पर्यवेक्षकों द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प लिया तथा यह विश्वास व्यक्त किया कि सामुदायिक सहभागिता और नियमित निगरानी के माध्यम से जिले में कुपोषण की समस्या को प्रभावी रूप से कम किया जा सकेगा।

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