लोकेशन कन्नौद
संवाददाता मधुर अग्रवाल
कन्नौद।
नगर की पावन धरा पर 20 मार्च से 27 मार्च तक आयोजित होने जा रहे 51 कुंडीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ गुरुवार को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नगर स्थित तालाब मंदिर से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
कलश यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विशेष रूप से नगर की मातृशक्तियों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। सिर पर कलश धारण किए महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीतों के साथ आगे बढ़ती नजर आईं, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
यह विशाल यात्रा तालाब मंदिर से प्रारंभ होकर मुख्य बाजार, बस स्टैंड, मेन बाजार सहित नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई यज्ञ स्थल सृजन स्कूल पहुंची। यात्रा के दौरान जगह-जगह सामाजिक संगठनों, व्यापारियों एवं नागरिकों द्वारा श्रद्धालुओं का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया।
कलश यात्रा में अनेक साधु-संत, आचार्यगण एवं धर्मगुरुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक धुनों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
यज्ञ स्थल पर मेला ,पार्किंग ,डॉ ,प्रशाशन की विशेष व्यवस्था की गई हे*
आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यज्ञ स्थल के आसपास विशाल मेला क्षेत्र तैयार किया गया है। यहां विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के साथ आवश्यक व्यवस्थाएं डॉ की टीम पुलिस प्रशासन उपलब्ध कराई गई हैं।
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था भी की गई है, जिससे यातायात में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रतिदिन होगा भव्य भंडारा
आयोजन के दौरान प्रतिदिन शाम को श्रद्धालुओं के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करेंगे।
सात दिवसीय आयोजन में होंगे विविध धार्मिक कार्यक्रम
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि सात दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ एवं कथा में प्रतिदिन यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन एवं भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। जगह जगह से आए विद्वान संत एवं कथावाचक अपने अमृतमय प्रवचनों से श्रद्धालुओं को लाभान्वित करेंगे।
लटकन बाबा बने आकर्षण का केंद्र
कलश यात्रा के दौरान अयोध्या से पधारे लटकन बाबा ने अपनी जटाओं से बिना किसी सहारे लटककर अद्भुत प्रदर्शन किया, जिसने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया
नगरवासियों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं। यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी जीवंत उदाहरण बनकर उभर रहा है।
