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नाशिक (महाराष्ट्र)पंचवटी काळाराम मंदिर प्रवेश डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर 2 मार्च 2026 को 96 साल पुरा होने पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमाचे आयोजन :-NN81




नासिक मे आज डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर काळाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह के अवशेष दिन पर मंदिर परिसर में बौद्ध धर्म के अनुसार बौद्ध धर्म के अनुयायियों द्वारा पंचशील वंदना लेकर मंदिर परिसर को प्रसन्न कर दिया .धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का अभी आयोजन किया गया था

कालाराम मंदिर सत्याग्रह की ...

डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नेतृत्व में 2 मार्च 1930 को नासिक के कालाराम मंदिर में दलितों के प्रवेश के लिए ऐतिहासिक सत्याग्रह शुरू हुआ। इस आंदोलन का उद्देश्य छुआछूत को मिटाना और दलितों को मंदिर में प्रवेश का समान अधिकार दिलाना थाजिसमें लगभग 15,000 प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया। यह संघर्ष 1935 तक चला। 

कालाराम मंदिर सत्याग्रह की मुख्य बातें

ऐतिहासिक शुरुआत: 2 मार्च 1930 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने नासिक के कालाराम मंदिर में दलितों और अछूतों के प्रवेश के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया।

उद्देश्य: दलितों को हिंदू मंदिरों में प्रवेश का अधिकार दिलाना और उन्हें एक इंसान के रूप में सम्मान दिलानान कि केवल पूजा का अवसर।

भागीदारी: इस सत्याग्रह में मुख्य रूप से महार समुदाय और अन्य दलित वर्ग के लगभग 15,000 लोग शामिल हुए।

प्रमुख घटना: रामनवमी के दौरानसवर्णों ने समझौता तोड़कर दलितों को रथ खींचने से रोकने के लिए रथ ही गायब कर दिया था।

सत्याग्रह का महत्व: यह आंदोलन न केवल मंदिर प्रवेश के लिए थाबल्कि सामाजिक समानता और मानवीय अधिकारों की लड़ाई थी।

नेत्रत्व: इस सत्याग्रह में डॉ. अंबेडकर के साथ अमृतराव रणपिसेदादासाहेब गायकवाड़ और अन्य स्थानीय नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

यह आंदोलन जातिवाद के खिलाफ एक बड़ी चुनौती थी और इसने दलितों के स्वाभिमान को जगाने का काम किया।

*संवाददाता - संदीप गाडे*

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