इंदौर: जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में सतलोक आश्रम किठोदा (इंदौर) में 'संत गरीबदास जी महाराज' के बोध दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय महाविशाल समागम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर जहाँ आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा बही।
समागम के दूसरे दिन, 27 फरवरी को संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में 15 जोड़ों का दहेज मुक्त विवाह संपन्न हुआ। यह विवाह किसी आडंबर के बिना, गुरुवाणी के माध्यम से मात्र 17 मिनट में संपन्न हुआ। वर-वधू ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए साधारण कपड़ों में बिना किसी श्रृंगार के एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया।
रक्तदान: एम. वाय. अस्पताल इंदौर की टीम के सहयोग से आयोजित शिविर में अनुयायियों ने 112 यूनिट रक्तदान किया।
देहदान: मानवता के कल्याण हेतु 198 श्रद्धालुओं ने अपनी मृत्यु के पश्चात देहदान करने का संकल्प लिया और फॉर्म भरे।
इस समागम की सबसे विशेष बात यह रही कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा शास्त्रानुकूल तत्वज्ञान से प्रभावित होकर अन्य पंथों और मतों के कई साधु-संतों ने भी अपनी पुरानी मान्यताओं को त्याग कर संत रामपाल जी महाराज से निःशुल्क नाम दीक्षा ग्रहण की। उनके साथ-साथ सैकड़ों अन्य लोगों ने भी बुराइयाँ त्याग कर भक्ति मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
समागम में संत गरीबदास जी महाराज की अमृतमयी वाणी का अखंड पाठ किया गया। साथ ही, शुद्ध देशी घी से निर्मित लड्डू, जलेबी और विभिन्न व्यंजनों का 24 घंटे विशाल भंडारा चलता रहा। हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं के लिए आश्रम प्रबंधन और सेवादारों ने ऐसी व्यवस्था की थी कि कहीं कोई असुविधा देखने को नहीं मिली।
"सेवादारों का मानना है कि पूर्ण संत के सान्निध्य में अमर ग्रन्थ साहिब की वाणी श्रवण करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि वातावरण भी शुद्ध होता है।"
इस समागम ने सिद्ध कर दिया कि आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों को दूर करना ही सच्ची मानवता है।
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जिला गुना से गोलू सेन की रिपोर्ट
