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करनी सेना द्वारा काले कपड़े पहनकर UGC कानून का पुतला दहन कर विरोध जताया: NN81

 




 मध्यप्रदेश 

 सिवनी 

अरुण राजपूत 


बड़ी खबर सिवनी से राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के द्वारा  यूजीसी द्वारा प्रस्तावित लागू किये जा रहे तथाकथित यूजीसी काला कानून 2026 के विरोध एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026) के सवर्ण विरोधी एवं भेदभावपूर्ण प्रावधानों के विरोध एवं तत्काल निरस्त कर, इस कानून को वापस लेने और भविष्य में ऐसे कानूनों पर रोक लगाने के संबंध में मंगलवार को करणी सेना  परिवार बड़ी संख्या में कचहरी चौक में एकत्रित हुए। करणी सेना परिवार ने जमकर नारेबाजी की, रैली निकाल कलेक्ट्रेट जाकर माननीय राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने के पूर्व करणी सेना परिवार ने कचहरी चौक में यूजीसी का पुतला दहन किया। प्रशासन द्वारा पूर्व से ही भारी पुलिस बल एवं फायर ब्रिगेड की व्यवस्था की थी जिसमें पुतला दहन के बाद करणी सेना परिवार के ऊपर पानी की बौछार की गई। करणी सेना ने ज्ञापन में निवेदन किया कि हम सिवनी जिले के सामान्य वर्ग (जनरल अनरिर्वक ईडब्लू एस) के छात्र छात्राओं, अभिभावकों एवं जागरूक नागरिकों की ओर से यह ज्ञापन आपके माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदय एवं माननीय प्रधानमंत्री महोदय को प्रेषित करना चाहते हैं। यूजीसी द्वारा वर्ष 2026 में लागू प्रस्तावित नियमों के अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों में जिस प्रकार की व्यवस्था की जा रही है, वह संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार तथा न्याय के सिद्धांत के विपरीत प्रतीत होती है। इन नियमों से शिक्षा का वातावरण समान अवसर से हटकर भय, असुरक्षा एवं वर्ग आधारित भेदभाव की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिये समान सुय्क्षा एवं निष्पक्ष प्रक्रिया का स्पष्ट अभाव है। शिकायत दर्ज होते ही, बिना प्राथमिक जाँच के कार्रवाई की संभावना से छात्रों का भविष्य संकट में पड़ सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान पूर्णतः गोपनीय रहते हुए, आरोपी छात्र को अपनी बात रखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। "भेदभाव" की परिभाषा अत्यंत अस्पष्ट होने के कारण इसके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे प्रावधानों से गरीब एवं मध्यवर्गीय सामान्य वर्ग के परिवारों पर अत्यधिक मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दबाव पड़ता है। आगे उन्होंने उल्लेख किया है कि इस ज्ञापन को माननीय राष्ट्रपति व माननीय प्रधानमंत्री तक ययाशीघ्र पहुँचाया जाये। यूजीसी काला कानून 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाये, अथवा पुनः समीक्षा हेतु रोका जाये। सभी वर्गों के छात्रों के लिये समान सुरक्षा, समान प्रक्रिया और समान न्याय सुनिश्चित किया जाये। हमें पूर्ण विश्वास है कि देश का शीर्ष नेतृत्व इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता से विचार करेगा और छात्रों के भविष्य की रक्षा हेतु उचित निर्णय लेगा।

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