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परिक्रमा:धर्मपुरी महाराज की उद्गम स्थल अमरकंटक से अधोमुखी पैदल यात्रा, मंडला जिले में प्रवेश! - NN81




NEWS NATION 81

संवाददाता- गजेंद्र पटेल

लोकेशन- जिला मंडला 

 मध्यप्रदेश में इन दिनों आस्था और संकल्प की एक अद्भुत यात्रा लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। डिंडोरी जिले के करंजिया विकासखंड निवासी संत धर्मपुरी महाराज मां नर्मदा की 3500 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पर निकले हैं। यह यात्रा उन्होंने 11 दिसंबर को मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से प्रारंभ की थी। विशेष बात यह है कि धर्मपुरी महाराज यह पूरी परिक्रमा हाथों के बल अधोमुखी पैदल कर रहे हैं। वे प्रतिदिन लगभग तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। उनके साथ उनके अनुयायी भी इस कठिन साधना में सहभागी बने हुए हैं।


डिंडोरी से मंडला में प्रवेश

बुधवार को “नर्मदे हर” के जयघोष के बीच धर्मपुरी महाराज ने डिंडोरी जिले की सीमा पार कर मंडला जिले में प्रवेश किया। विकासखंड मोहगांव अंतर्गत ग्राम आंडियामाल में उनके प्रथम आगमन पर ग्रामीणों ने विधि-विधान से स्वागत, वंदन और पूजन-अर्चन किया। ग्रामीणों ने बंबुलिया भजन गाते हुए पुष्पवर्षा कर महाराज की अगवानी की। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि बंबुलिया भजन बुंदेलखंडी लोकगीत परंपरा से जुड़ा है, जिसे नर्मदांचल क्षेत्रों में मां नर्मदा की महिमा का बखान करते हुए तीर्थयात्रियों के स्वागत में गाया जाता है।

यात्रा का क्रम

प्रथम दिवस: ग्राम आंडियामाल (मोहगांव) में स्वागत एवं विश्राम।

द्वितीय दिवस (गुरुवार) ग्राम चाबी स्थित उपकेश्वरी नर्मदा कुंड राधा-कृष्ण मंदिर में विश्राम।

तृतीय दिवस (शुक्रवार) मोहगांव की ओर प्रस्थान।

जैसे-जैसे यह यात्रा मंडला की ओर अग्रसर हो रही है, वैसे-वैसे मार्ग में बसे गांवों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कई स्थानों पर लोग घंटों पहले से सड़क किनारे बैठकर महाराज के दर्शन की प्रतीक्षा करते देखे गए। पूरा क्षेत्र “नर्मदे हर” के जयघोष से गूंज रहा है।


बचपन से साधु-संतों का संग

धर्मपुरी महाराज सात वर्ष की आयु से ही साधु-संतों के सान्निध्य में रहे हैं। यह उनकी चौथी नर्मदा परिक्रमा है, किंतु पहली बार वे हाथों के बल अधोमुखी परिक्रमा कर रहे हैं। उनकी इस असाधारण साधना को देखकर लोग आश्चर्यचकित होने के साथ प्रेरित भी हो रहे हैं।


आस्था, संयम और संकल्प की मिसाल 

ग्रामीणों का मानना है कि धर्मपुरी महाराज की यह परिक्रमा मानव कल्याण के लिए की जा रही एक अत्यंत कठिन तपस्या है। यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम, भक्ति और अटूट विश्वास की जीवंत मिसाल बन गई है। डिंडोरी से मंडला मार्ग तक भक्ति और श्रद्धा का वातावरण निर्मित है। धर्मपुरी महाराज की यह अधोमुखी परिक्रमा आमजन के लिए आस्था और समर्पण का अनूठा उदाहरण बनती जा रही है।

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