अमरोहा। शहर में आयोजित एक जलसा-ए-दस्तारबंदी को संबोधित करते हुए आलिम-ए-दीन मुफ्ती तैय्यब अहमद कादरी नईमी ने मुसलमानों से गुमराही से बचने और पंचवक्ता नमाज को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया और आखिरत दोनों की कामयाबी का रास्ता नमाज से होकर गुजरता है।
ईदगाह रोड पर दाऊद सराय रोड स्थित मदरसा जामिया नूरिया अशरफुल उलूम के संयोजन में आयोजित जलसे की शुरुआत कारी जमशेद ने कलाम-ए-इलाही से की। इसके बाद कारी मोहम्मद फुरकान रजा मुरादाबादी और मौलाना सुब्हान रजा संभली ने नात-ए-पाक पेश कर समां बांध दिया।
जलसे के दौरान मदरसे से फारिग हुए पांच छात्रों की दस्तारबंदी भी की गई। अपने संबोधन में मुफ्ती तैय्यब कादरी नईमी ने फरमाया कि नमाज हर बालिग और समझदार इंसान पर फर्ज है। यह केवल दो हालात में माफ है—एक, जब इंसान की मौत हो जाए और दूसरा, जब उसकी अक्ल खत्म हो जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति न तो मृत है और न ही पागल, तो उस पर हर हाल में नमाज अदा करना जरूरी है।
मुफ्ती नईमी ने नमाज की फजीलत बयान करते हुए कहा कि नमाज इंसान को बेहयाई से रोकती है, चेहरे पर नूर लाती है, दिल को सुकून देती है, रिज्क में बरकत करती है और सेहत को दुरुस्त रखती है। नमाज के जरिए अल्लाह की कुर्बत भी हासिल होती है।
जलसे में उत्तराखंड के काशीपुर से आए अल्लामा हाशिम नूरी ने लोगों से अपने दिलों में मोहब्बत-ए-रसूल बसाने की अपील की। वहीं मदरसे के उस्ताद मुफ्ती नसीम मंजरी ने जामिया नूरिया अशरफुल उलूम की 20 वर्षों की शैक्षिक और दीनी सेवाओं पर विस्तार से रोशनी डाली।
सलात-ओ-सलाम के बाद मुल्क में अमन-चैन और कौम की सलामती की दुआ के साथ जलसे का समापन हुआ। इस मौके पर मुफ्ती अरकान अजहरी, मौलाना मोहम्मद अकरम आफाकी, कारी मुज्जफर, कारी फुरकान रजा, मुफ्ती अब्दुल जब्बार अमजदी, मुफ्ती नूर मोहम्मद, कारी दाऊद, हाफिज इमरान, हाफिज फैजान, इरफान मंसूरी, रिजवान मंसूरी, आसिफ मंसूरी, शजर आलम शाही, सलीम घोसी, अतहर अंसारी, यासिर अंसारी और फिरोज कुरैशी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद
