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गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती का सात दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण पूर्ण :-NN81



जैविक खेती आज की आवश्यकता, इसे किसानों में व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की जरूरत: मंजू राजपाल


सभी सत्रों में रहा सरोज देवी फाउंडेशन संरक्षक त्रिलोक चंद छाबडा का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन, राज्य के लगभग 325 किसानो ने लिया भाग


 गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सप्त दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सरोज देवी फाउंडेशन के संरक्षक त्रिलोकचन्द छाबड़ा की पहल पर गोयल ग्रामीण विकास संस्थान श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, जाखोडा, कैथून, कोटा, सरोज देवी फाउंडेशन, भीलवाडा, अपना संस्थान, एवं एफईएस के संयुक्त तत्वावधान में सात 18 फरवरी 2026 से 24 फरवरी 2026 तक किया गया। प्रशिक्षण प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 11 बजे तक आयोजित हुआ। कार्यक्रम में श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के मुख्य वैज्ञानिक पवन टांक द्वारा किसानों को गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई। इन सभी सत्रों में त्रिलोक चंद छाबडा संरक्षक सरोज देवी फाउंडेशन का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। समन्वयक महेश चन्द्र नवहाल ने बताया कि जैविक खेती की इस प्रशिक्षण में योजनाबद्ध तरीके से विषय निर्धारण कर प्रशिक्षण दिया गया द्य जिससे जैविक खेती के बारे में किसानो को जानकारी की पूर्णता का अनुभव हो। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई। जिसमें कृषि में तकनीकी जानकारी का महत्व, जैविक खेती के लिये खेत चयन ताजा गोबर व गोमूत्र के उपयोग, बफर जोन एवं वृक्षारोपण,विविध वृक्ष प्रजाति के लाभ एवं सावधानियां तथा आवश्यक सुविधाओं के निर्माण एवं संकलन, मिट्टी एवं पानी की प्रयोगशाला जांच, प्रारंभिक दस्तावेजीकरण (फार्म बुक), जैविक प्रमाणीकरण, अवशेष प्रबंधन एवं साफ-सफाई तथा दीमक एवं सफेद मक्खी नियंत्रण, सरल खाद। निर्माण,सरल संजीवनी विधि से खेतों को ताकत देना, सावधानियां, फसल अनुसार मात्रा निर्धारण, हरी खाद (ढैंचा फसल) एवं गोमूत्र से सरल हाई पावर विधि की जानकारी दी गई। समापन प्रशिक्षण सत्र में कृषि विभाग, राजस्थान सरकार की प्रिंसिपल सेक्रेटरी (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल ने जैविक एवं गो आधारित खेती को लेकर राज्य सरकार की योजनाओं एवं सफल प्रयासों की जानकारी साझा करते हुए किसानों से इसे अपनाने तथा अपने अपने क्षेत्र में बाकी किसानो को जोड़ने का आह्वान किया। इस सात दिवसीय प्रशिक्षण में कृषि विभाग की ओर से डिप्टी डायरेक्टर राजेन्द्र सिंह मनोहर, अजय कुमार पचोरी ने महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। समापन सत्र में श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के संस्थापक ताराचंद गोयल ने जुड़े हुए किसानों को मास्टर ट्रेनर के रूप में जैविक खेती प्रशिक्षण को नीचे के स्तर पर ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। ताराचंद गोयल ने कहा कि संस्थान की स्थापना ही इसलिए की गई है ताकि गो आधारित जैविक खेती को वैज्ञानिक तरीके से प्रतिपादित करते हुए जैविक खेती से उतना ही उत्पादन पहले साल में लिया जा सके जितना केमिकल खेती से लिया जाता है। एफईएस के स्टेट हेड एवं कोऑर्डिनेटर शांतनु राय सिन्हा ने विश्वास व्यक्त किया कि जैविक खेती के इस प्रशिक्षण को हर ग्राम पंचायत में नीचे के स्तर तक ले जाएंगे। इस प्रशिक्षण में राज्य के लगभग 325 किसानो ने भाग लेकर अपने खेत में जैविक खेती को अपनाने के संकल्प को दोहराया। एसडी फाऊंडेशन से मनोज पालीवाल, भेरुलाल गुर्जर ने समन्वय किया। यह प्रशिक्षण आने वाले दिनों में आगे भी निरंतर जारी रहेगा। जिस से अधिक से अधिक किसानो को इसका लाभ प्राप्त हो सके।

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