पीएम मोदी के नेतृत्व में हो रही सनातन संस्कृति के गौरव की पुर्नस्थापना -सीएम डॉ. यादव
सनातन दीक्षा ग्रहण कर संत बने तीन दीक्षार्थी, संतों ओर समाज ने किया अभिनंदन
हरि शेवा आश्रम परिसर में सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह का भव्य आयोजन
धर्मनगरी भीलवाड़ा के लिए 26 फरवरी गुरूवार एतिहासिक दिवस बन गया जब हरिशेवा आश्रम सनातन मंदिर में सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से ख्यातनाम महामंडलेश्वरों, श्री महंतो, महन्तों व संत महात्माओं की एक मंच पर मौजूदगी ने सनातन संस्कृति के ‘‘मिनी महाकुंभ’’ का नजारा प्रस्तुत कर दिया। इस दौरान उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज रमणरेती मथुरा की अध्यक्षता एवं हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ महाराज के विशिष्ट आतिथ्य ने धर्मसत्ता के साथ राजसत्ता का संगम करा दिया। समारोह में दीक्षार्थी ब्रह्मचारी इन्द्रदेव, कुनाल एवं सिद्धार्थ की उदासीन अखाड़े के सनातनी संत दीक्षा की रस्मे हुई तो पांडाल सनातन के जयकारों से गूंजायमान हो उठा। दीक्षा के बाद ब्रह्मचारी इन्द्रदेव को ईशानराम उदासीन, ब्रह्मचारी कुनाल को केशवराम उदासीन एवं ब्रह्मचारी सिद्धार्थ को सुयज्ञराम उदासीन का सन्यासी नाम घोषित हुआ तो श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। समारोह में संत महात्माओं ने नव दीक्षित संतों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके लिए मंगलभावनाएं व्यक्त की ओर सनातन संस्कृति में संत के महत्व पर चर्चा की। अध्यक्षता कर रहे उदासीन कार्ष्णि पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज रमणरेती ने कहा कि हमारी गुरू परम्परा में सद्गुरू ही शिष्य के माध्यम से स्वयं को प्रकट करता है। संत अध्यात्म रूपी दीपक से समाज के अंधकार को दूर करते है। अपनी आत्मा के भीतर के अंधकार को मिटाने का सामर्थ्य गुरू के पास होता है। उन्होंने तीनों दीक्षार्थियों के प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि भीलवाड़ा में हुई दीक्षा ने सनातन समाज को तीन नए दीपक प्रदान किए है। सनातनियों को संतों की शरण में जाने पर अपने अंदर विराजित परमात्मा के दर्शन होंगे। सद्गुरू आचार्य ही अज्ञान का आवरण हमारी आत्मा से हटाते है। संत संयम जीवन में लौकिक वासनाओं का त्याग कर सर्व कल्याण की कामना करता है। समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी सनातनियों को वर्ष 2028 में महाकाल की नगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए आमंत्रित करते हुए तीनों दीक्षार्थियों के प्रति मंगलभाव व्यक्त किए ओर उनका अभिनंदन किया। डॉ.यादव ने कहा कि भीलवाड़ा में दीक्षा दान समारोह में संत महात्माओं की मौजूदगी से इन्द्र के दरबार को भी शर्माने वाला अद्भुत दृश्य उपस्थित है। संतान वंश की अमरता की निशानी होती है तो दीक्षा से संत परम्परा की अमरता आती है और सनातन संस्कृति गौरान्वित होती है। उन्होंनंे कहा कि संत हमारे दिव्य चक्षु होते है ओर इनके माध्यम से देवताओं के दर्शन होते है। संतों के लिए मन में श्रद्धा व आस्था के भाव होने चाहिए। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करते हुए वह दुनिया में वसुधैव कुटम्बकम ओर जीयो ओर जीने दो का संदेश देने वाली सनातन संस्कृति को फैला रहे है ओर सनातन के गौरव की पुर्नस्थापना हो रही है। मध्यप्रदेश सरकार भी उज्जैन,चित्रकूट आदि देवस्थानों को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर रही है। उन्होंने राम में राज का मतलब राजस्थान ओर म का मतलब मध्यप्रदेश बताते हुए कहा कि इन दोंनों का गहरा रिश्ता है ओर कोई जुदा नहीं कर सकता है। राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने नव दीक्षार्थी संतों के लिए मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा हो जाता है। राष्ट्र व सनातन की रक्षा के लिए सभी को जागरूक होना पड़ेगा। समारोह में राजस्थान सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति मजबूत हो रही है। उनके शासन में ही राम मंदिर निर्माण का 500 वर्ष पुराना सपना साकार हुआ है। हरि ओर हर का मिलन हो रहा है। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा धर्मनगरी बन चुका है ओर तीनों दीक्षार्थी संत सनातन धर्म का गौरव बढ़ाएंगे ऐसा विश्वास है। भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि इस एतिहासिक आयोजन ने हिन्दू ओर सनातन के लिए मिसाल कायम की है। उन्होंने भीलवाड़ावासियों की तरफ से देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत महात्माओं का अभिनंदन भी किया। समारोह में हरि शेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने आयोजन की सफलता के लिए सभी संतों एवं सम्पूर्ण सनातन समाज आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नव दीक्षित संत किसी समाज विशेष के नहीं होकर सनातन धर्म के लिए समर्पित रहेंगे ओर दुनिया में सनातन का संदेश फैलाएंगे। सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के भव्य आठ दिवसीय आयोजन ने भीलवाड़ा में धर्मभक्ति ओर सनातन एकता का नया इतिहास रचा है। इस आयोजन में कोई जाति समाज नहीं सर्व सनातन की भाव से कार्य हुआ ओर हमारा लक्ष्य एक संगत,एक पंगत, एक भेष एक भूषा रहा। जजमान से दक्षिणा के रूप में मात्र एक रूपए का सिक्का ओर श्रीफल स्वीकार किया गया। मंगलाचरण से प्रारंभ समारोह में संतों ने दीप प्रज्वलित किया। समारोह में महामंडलेश्वर शांतानंद महाराज, महामंडलेश्वर विवेकानंद महाराज, मेवाड महामंडलेश्वर हितेश्वरानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर जगदीशपुरी महाराज, महामंडलेश्वर कपिलमुनि महाराज,
श्रीमहंत धर्मेंद्र दास, श्रीमहंत दामोदर दास, महंत भरत दास, महंत स्वरुप दास उदासीन, महंत हनुमान राम उदासीन, महंत मोहन दास इंदौर, संत ओम दास, संत हंसदास रीवा, संत स्वरूप दास रीवा, संत संतराम इंदौर, श्री पंचमुखी दरबार भीलवाड़ा के महन्त लक्ष्मणदास त्यागी, श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के महन्त बाबूगिरी महाराज, हनुमान टेकरी के महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा, हाथीभाटा आश्रम के महन्त संतदास महाराज, निम्बार्क आश्रम के महन्त मोहनशरण शास्त्री, रामस्नेही संत दिग्विजयरामजी महाराज, संत प्रकाशानंद, संत गोविन्द राम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक निंबाराम आदि ने भी विचार व्यक्त करते हुए सनातन धर्म की एतिहासिक विरासत का गुणगान करते हुए दीक्षार्थी संतो के प्रति मंगलभावना व्यक्त की। संचालन महामंडलेश्वर ने किया।
बहुत जल्दी कन्हैया भी मथुरा में मुस्कराएंगे
समारोह में अयोध्या में राम मंदिर बनने का प्रसंग ओर पर अभी तो पहली झांकी है मथुरा काशी बाकी है के नारे गूंजे तो डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बहुत जल्दी मथुरा में कन्हैया भी मुस्कराएंगे। बाबा विश्वनाथ काशी में जगमगा रहे है। कई संतों ने कहा कि कुछ पीढ़ियों पहले जो तलवार के डर से सनातन छोड़ गए उनकी भी घर वापसी करानी है। समारोह में सनातन धर्म की जय, भारत माता की जय, जय श्री राम, वंदे मातरम जैसे जयकारे भी गूंजायमान होते रहे।
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम नव दीक्षित संतों को मंच पर लेकर आए
हरि शेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज दीक्षार्थी ब्रह्मचारी इन्द्रदेव, कुनाल एवं सिद्धार्थ को लेकर मंच पर पहुंचे। भगवा वस्त्रधारी तीनों दीक्षार्थियों को मंच पर गुरू मंत्र एवं हरिशेवाधाम के चिन्ह प्रदान किए गए। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने तीनों दीक्षिार्थियों को भावी जीवन के लिए आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि अब उनका गृहस्थ जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं रहेगा ओर सनातन की सेवा ही उनका धर्म होगा। दीक्षार्थियों ने महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज सहित मंच पर मौजूद सभी संत महात्माओं को साष्टांग दण्डवत प्रणाम किया। संतों ने शॉल ओढ़ा व माला पहनाकर नवदीक्षित संतों को आशीर्वाद प्रदान किया। समारोह सम्पन्न होने नव दीक्षित संतों के अभिनंदन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
भीलवाड़ा के संतों ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा
दीक्षा दान समारोह में नव दीक्षित संतों को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ धर्मनगरी भीलवाड़ा के विभिन्न धर्मस्थलों के महन्त ओर संत भी पहुंचे।
समष्टि भण्डारे में उमड़ा आस्थावान सनातनियों का सैलाब
सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के सम्पन्न होने पर अग्रवाल उत्सव भवन में एक संगत एक पंगत की भावना से समष्टि भण्डारे का आयोजन किया गया। इसमें महाप्रसाद पाने के लिए सनातनियों का सैलाब उमड़ पड़ा। भीलवाड़ा के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों से आयोजन में शामिल होने के लिए पहुंचे हजारों सनातनी बंधुओं ओर बहनों ने इस भण्डारे में महाप्रसाद को पाया। सभी को पंगत लगाकर प्रसाद परोसा गया। इस अवसर पर झूठा नहीं छोड़ने की प्रेरणा भी प्रदान की जाती रही। सनातन सेवा समिति एवं हंसगंगा हरि शेवा मण्डल के सदस्यों के साथ भीलवाड़ा के विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के सदस्यों ने समर्पित भाव से इस विशाल भण्डारे के सफल आयोजन के लिए सेवाएं प्रदान की।
फूलों की होली के साथ रासलीला का समापन
सनातन मंगल महोत्सव के अवसर पर श्रीधाम वृन्दावन के रसिकाचार्य कुंजबिहारी शर्मा श्री निकुंज बिहारी रासलीला मण्डल के लीलाकारों द्वारा आयोजित आठ दिवसीय रासलीला का समापन गुरूवार शाम को हुआ। रासलीला के समापन पर फूलों की होली खेली गई ओर फाल्गुन के गीतों पर कलाकारों ने प्रस्तुति दी। रासलीला समापन के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
