जिन्होंने आज़ाद हिंद फौज द्वारा भारत में आजादी की चिंगारी को हवा दी और अंततः भारत को आजादी मिली। साथ ही साथ हम याद करते हैं
आज़ाद हिन्द फौज के महान् स्वतंत्रता सेनानी ठा. सा.रडमल सिंह जी गांव लाम्बा तह. बनेड़ा जिला भीलवाड़ा को जिनका जन्म 24 फरवरी 1922 को हुआ था।इन्होने मलाया(मलेशिया)मे 23 नवंबर 1941 से 14 फरवरी 1942 तक सुभाष चंद्र बोस जी के साथ रहकर ब्रिटिश शासन के विरोध में भारत की स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाई थी ,अतः आपको युद्धबंदी (POW)बनाकर 15 फरवरी 1942 से 4 सितम्बर 1945 तक जेल में डाल दिया गया था।नेताजी सुभाष बोस के साथ ठा. सा. रडमल सिंह जी तथा सभी POW सैनिकों को एकत्रित करके जापान की सहायता से इम्फाल कोहिमा के रास्ते भारत की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजो के विरुद्ध युद्ध लड़ा था।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेज़ों ने आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों को बागी घोषित कर दिया था परन्तु इससे पुरे भारत में आजादी की चिंगारी भड़क गई और अंत में 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत का निर्माण हुआ।
ठा. सा. रडमल सिंह जी ने 12 जनवरी 2001 को इस स्वतंत्र भारत को अलविदा कहा परन्तु उनके द्वारा भारत को स्वतंत्र करने के लिए जो ऐतिहासिक संघर्ष विदेशी धरती पर रहकर नेताजी के साथ कंधे से कंधे मिलाकर किया गया हमेशा अमिट छाप है।
