राजस्थान
श्रीनाथजी मंदीर नाथद्वारा ।
नाथद्वारा नगर स्थित पुष्टि मार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में बसंत पंचमी के साथ सवा महीने तक चलने वाले फागोत्सव की धूम शुरू हो गई है । वहीं मंदिर में गुलाल के दर्शन करने वैष्णवो की भीड़ आना शुरू हो गई है ।
मंदिर में फागोत्सव को लेकर वैष्णवों का उत्साह देखते ही बन रहा था, जैसे ही पाट खुले, लाडले लाल के जयकारों से मंदिर गूंज उठा।
मंदिर में मुखियाजी ने सफेद पिछवाई पर अबीर से चिडिय़ा के प्रतीक अंकित किए और श्रीनाथजी को फाग खेलाया, ठाकुरजी को लाड़ लड़ाने के बाद मुखियाजी ने दर्शनार्थियों को भी फाग खेलाई,
आज श्रीजी में दो राजभोग अरोगाये जाते हैं, आज की सेवा में बसंत अधिवासन किया जाता है। बसंत के कलश की स्थापना की जाती है जिसमें रजत कलश में जल भरकर इसे खजूर की डाल, आम के वृक्ष के पत्तों सहित आम्र मंजरी, सरसों के पीले पुष्प सहित टहनियां, गेहूं की बालियाँ, बेर आदि एवं विविध पुष्पों से सजाया जाता है ।
वहीं आज राजभोग की आरती करते समय पुष्प उडाये जाते हैं ।
सबसे पहले ठाकुरजी को दंडवत प्रणाम करने के बाद केसरी चन्दन से, गुलाल से, अबीर से व अंत में चोवा से खिलाया जाता है । इसके बाद डोल-तिबारी में दर्शन कर रहे वैष्णवों पर अबीर और गुलाल छांटी जाती है।
दूसरे राजभोग में गेहूं की पाटिया के लड्डू, कठोर मठडी, कूर के गुंजा, छुट्टी-बूंदी, दूधघर में सिद्ध मावे के पेड़ा-बरफी, दूधपूड़ी केसरी-सफेद मावे की गुंजिया सहित विविध प्रकार के आचार, विविध प्रकार के फलफूल, शीतल आदि अरोगाये जाते हैं ।
वर्षभर में केवल आज के दिन श्रीजी में नौं दर्शन खुलते हैं, बसन्त पंचमी से ही शाम को श्रीनाथजी में शयन के दर्शन भी आरंभ हो जाएंगे जो रामनवमी तक होंगे ।
श्रीनाथजी मंदिर में पूरे सवा महीने तक फाग उत्सव चलता है जिसमें प्रतिदिन श्रीजी को गुलाल से खेलाया जाता है व रसिया का गायन किया जाता है ।
