लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़
संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर - नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में 84 परगना छोटेडोंगर के देवी-देवताओं के भव्य सम्मेलन व माता पहुंचनी कार्यक्रम यह छत्तीसगढ़ का बस्तर आदिवासी बाहुलय क्षेत्र है और यहां आदिवासी अपनी रीति रीवाज, परम्परा एवं देवी देवताओं के पूजा मे आस्था रखते है ।इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए छोटेडोंगर के माता मंन्दिर मे शनिवार को मांझी ,पात्र, और बेलसरिया परिवार के द्वारा माता पहुंचानी का भव्य आयोजन किया गयाl इस आयोजन मे महिलाओ द्वारा मांझी निवास ताराभाटा और पात्र परिवार निवासी गढ़पारा एवं दंतेश्वरी मंदिर के निवास से कलश यात्रा निकाल कर माता मन्दिर मे स्थापित किया गया। आज माता मंदिर में सुबह से श्रद्धा और उल्लास का एक अद्भुत संगम देखने को मिला इस अवसर में माता पहुंचनी सहित विभिन्न ग्रामों के देवी-देवताओं के भव्य सम्मेलन का हुए जिसे स्थानीय ग्रामीणों ने पूरी भव्यता और हर्षोल्लास के साथ संपन्न किया इस पारंपरिक आयोजन में 84 परगना एवं आसपास के विभिन्न देवी-देवताओं के विग्रहों और प्रतीकों को लाया गया।ढोल- नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर थिरकते ग्राम वासियों-ग्रामीण और सेवादारों ने इस शौभायात्र का वातावरण को भक्तिमय बना दिया।मान्यता है कि इस तरह के सम्मेलन से क्षेत्र में सुख-शांति और खुशहाली आती है। ग्रामीणो ने बताया कि इस तरह के सम्मेलनों से आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है
हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है-माता पहुंचनी के आशीर्वाद से आज पूरा क्षेत्र एक सूत्र में बंधा नजर आया।
ग्रामीणों के अनुसार- यह सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह आपसी भाईचारे और बस्तर की समृद्ध विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है बस्तर की संस्कृति में देवी-देवताओं का स्थान सर्वोच्च है ।आज का यह सम्मेलन हमारी प्राचीन परंपराओं के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है ,बस्तर संभाग की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्रों में परंपराओं का निर्वहन आज भी उसी जीवंतता के साथ किया जाता है जैसा सदियों पहले था। यह आयोजन लगभग 70 साल पहले हुआ था। जिसके बाद आज 70 साल के बाद यह आयोजन किया गया।इस आयोजन में हज़ारो की संख्या में लोगों ग्राम बड़ेडोंगर, फरसगांव, अंतागढ़,जगदलपुर, मर्दापाल , नारायणपुर, बेनूर,केशकाल, कांकेर,ओरछा, एंव आसपास क्षेत्र के ग्रामीण माताएं बहने, महिला, पुरुष व छोटे-छोटे बच्चे, इस माता पहुंचानी में अपने परिवार के साथ शामिल हुए
