सेठानी घाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब, संक्रांति के दूसरे दिन भी नर्मदा तट पर गूंजे जयकारे
ओमप्रकाश साहू नर्मदापुरम।
मां नर्मदा की पावन धारा में आस्था की डुबकी लगाने श्रद्धालुओं का सैलाब मकर संक्रांति के दूसरे दिन गुरुवार को भी नर्मदापुरम पहुंचता रहा। अल सुबह से ही सेठानी घाट सहित शहर के सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ठंड और कोहरे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
भोपाल, छिंदवाड़ा, हरदा, विदिशा सहित आसपास के कई जिलों से हजारों श्रद्धालु नर्मदा स्नान के लिए नर्मदापुरम पहुंचे। घाटों पर “हर-हर नर्मदे” और “जय मां नर्मदा” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा तट धार्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
सेठानी घाट, विवेकानंद घाट, परमहंस घाट, पर्यटन घाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा लगा रहा। बुधवार रात से ही मकर संक्रांति पर्व की शुरुआत हो चुकी थी और परंपरा के अनुसार पहले दिन के बाद दूसरे दिन भी स्नान और दान का क्रम लगातार जारी रहा।
दान-पुण्य का विशेष महत्व, श्रद्धालुओं ने निभाई परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिससे यह काल अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। पद्म पुराण में वर्णित है कि इस दिन स्नान, दान और जप से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने घाटों पर गेहूं, गुड़, तिल, दाल, वस्त्र, नारियल एवं दक्षिणा का दान किया तथा भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।
इस वर्ष महाकुंभ योग के कारण संक्रांति का महत्व और भी बढ़ गया है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में विशेष वृद्धि देखी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सेठानी घाट, कोरी घाट, गोंदरी घाट, विवेकानंद घाट, बांद्राभान, सांडिया, आंवलीघाट, बाबरी एवं सूरजकुंड सहित जिलेभर के सभी घाटों पर पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात रहे।
प्रशासन द्वारा लगातार घाटों पर निगरानी रखी गई, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। श्रद्धालुओं ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना की और शांतिपूर्ण ढंग से पर्व मनाया।
आस्था, परंपरा और व्यवस्था का सुंदर संगम
नर्मदापुरम में मकर संक्रांति पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और प्रशासनिक समन्वय का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भीड़ यह संदेश दे गई कि मां नर्मदा के तट पर आस्था कभी कम नहीं होती।
