राजस्थान
राजसमंद।
कुंभलगढ़ में जिप्सी चालकों का फूटा गुस्सा,
वन विभाग पर तानाशाही और आर्थिक शोषण के गंभीर आरोप।
राजसमंद। कुंभलगढ़ में जंगल सफारी को लेकर मंगलवार को जिप्सी चालकों और मालिकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। जिप्सी एसोसिएशन अध्यक्ष के नेतृत्व में वन विभाग राजसमंद के नाम ज्ञापन सौंपकर विभाग पर तानाशाही रवैये और खुले आर्थिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए।
ज्ञापन में साफ कहा गया कि जंगल सफारी शुरू हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन आज तक जिप्सी चालकों और मालिकों को एक भी रुपया भुगतान नहीं किया गया, वहीं पुरानी डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) की जमा राशि भी विभाग ने अब तक दबाकर रखी है। इससे दर्जनों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
जिप्सी एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि वन विभाग केवल फरमान जारी करने, नियम-शर्तें थोपने और डराने की नीति पर चल रहा है, जबकि विभाग खुद किसी भी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है।
न तो समय पर भुगतान, न पारदर्शिता और न ही जवाबदेही—पूरी व्यवस्था एकतरफा बना दी गई है।
आज यह ज्ञापन क्षेत्रीय वन अधिकारी कुंभलगढ़ को सौंपते हुए तत्काल बकाया भुगतान, डीडी राशि की वापसी और मनमानी शर्तों को वापस लेने की मांग की गई।
इस विरोध प्रदर्शन में जिप्सी एसोसिएशन अध्यक्ष अल्पेश कुमार असावा, उपाध्यक्ष यासीन खान, साथ ही राजेश जैन, रतन सिंह चौहान, सोनू खान, भेरू सिंह, मांगीलाल मेघवाल, निर्मल चौधरी सहित बड़ी संख्या में जिप्सी चालक और मालिक शामिल रहे।
एसोसिएशन ने दो टूक चेतावनी दी कि
“यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जंगल सफारी पूरी तरह ठप की जाएगी और आंदोलन को जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।”

