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मतदाता पुनरीक्षण में नियमों की अनदेखी का आरोप, थोक में फ़ॉर्म-7 जमा करने पर उठा विवाद: NN81


 राजस्थान 

रिपोर्टर - मीठालाल गुर्जर 

राजसमंद जिले के 

कुंभलगढ़।

विधानसभा क्षेत्र कुंभलगढ़ में चल रही मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के दौरान नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी कुंभलगढ़ को दिए गए एक लिखित ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं द्वारा बिना किसी ठोस कारण व विवरण के थोक में फ़ॉर्म-7 एवं फ़ॉर्म-6 जमा कराए गए हैं, जो भारत निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देशों के विरुद्ध है।


ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 12 दिसम्बर 2025 को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया था तथा 12 दिसम्बर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावे व आपत्तियाँ दर्ज कराने की अवधि निर्धारित थी। इसी अवधि के दौरान उपखंड कार्यालय में एक ही दिन में सैकड़ों से लेकर हजारों की संख्या में फ़ॉर्म-7 एवं फ़ॉर्म-6 जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है।


आवेदन में इलेक्टोरल मैन्युअल-2023 के पैरा 11.3.2 (2) का हवाला देते हुए कहा गया है कि ब्लॉक (थोक) में आवेदन स्वीकार किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। नियमानुसार कोई भी व्यक्तिगत मतदाता केवल एक ही फ़ॉर्म प्रस्तुत कर सकता है, जबकि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 को प्रतिदिन अधिकतम 10 फ़ॉर्म जमा कराने की अनुमति है। साथ ही प्रत्येक फ़ॉर्म में मतदाता की पूर्ण जानकारी, मोबाइल नंबर, आवश्यक साक्ष्य एवं अंडरटेकिंग संलग्न होना अनिवार्य है।


ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इन नियमों की अनदेखी करते हुए थोक में आवेदन प्रस्तुत किए गए, जो निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।


इस संबंध में मांग की गई है कि नियम विरुद्ध जमा किए गए सभी फ़ॉर्म-6, 7 एवं 8 पर किसी भी प्रकार का संज्ञान न लिया जाए, साथ ही उपखंड कार्यालय में जमा हुए सभी फ़ॉर्मों की दिनांकवार संकलित सूची नियमानुसार उपलब्ध करवाई जाए। इसके अतिरिक्त, नियमों का उल्लंघन कर आवेदन प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की गई है।


राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और निर्वाचन आयोग के निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए कौन-से कदम उठाए जाते हैं।

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