रोशनी सिंह-पन्ना-
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने से यहां आने वाले सैलानियों को काफी प्रसन्नता होती है ।और वे बाघों का दर्शन भी आसानी से कर पाते हैं ।लेकिन जिन बाघों की बहुतायत और उनके दर्शन से एक बेहतरीन पर्यटन क्षेत्र पन्ना में विकसित हुआ है। उन बाघों में से किसी को चोट लगने पर या किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचने पर इलाज के लिए बड़े अधिकारियों के आदेशों का इंतजार करना पड़ता है । वाइस ओवर -- आपको बता दें कि किसी भी वन्य प्राणी के इलाज के लिए मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक के आदेश की आवश्यकता होती है। और उनके आदेश के बिना किसी भी वन्य जीव और खासकर बाघ का इलाज नहीं किया जा सकता ।आपको बता दें कि पन्ना टाइगर रिजर्व का बाघ P243 के सिर में 6 महीने पहले भी एक बड़ा घाव हुआ था। जिसका इलाज किया गया था और कुछ ठीक होने पर उसे वापस जंगल में छोड़ दिया गया था ।अब जो ताजा स्थिति सामने आई है उसमें यह बाघ काफी तकलीफ में नजर आ रहा है इसके सिर पर उसी जगह पर जो घाव है उसकी स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है की काफी दिनों से इसे इलाज मुहैया नहीं हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व केउप क्षेत्रसंचालक मोहित सूद से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार हमें इस बाघ के उपचार के लिए अनुमति मिल गई है ।और हम इसका इलाज जंगल में ही एंटीबायोटिक के डोज देकर के करेंगे । मोहित सूद ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही यह बाघ ठीक हो जाएगा ।
आपको बता दें कि इस बाघ की उम्र 12 वर्ष से अधिक हो चुकी है और पन्ना टाइगर रिजर्व में इस बाघ का उल्लेखनीय योगदान यहां की बाग संख्या को बढ़ाने में रहा है। अपनी ढलती उम्र के पड़ाव में किसी अनजान कारण से इसके सिर में चोट लगी जो महीनो बाद भी पूर्णतया ठीक नहीं हो पाई है। और एक बार फिर से उसके घाव हरे हो गए हैं। यहां यह बात भी बताना महत्वपूर्ण है कि पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के पास यह अधिकार नहीं होता है कि वह अपने स्तर पर किसी भी घायल या बीमार वन्य जीव को तत्काल उपचार उपलब्ध करा सके इसके लिए उन्हें अपने वरिष्ठ वन्य जीव संरक्षक अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता होती है ।बहरहाल इस बाघ को हाथियों की मदद से ढूंढ करके उसके उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई है। और भारत के राष्ट्रीय पशु के प्रतीक इस बाघ के लिए हम भी यही प्रार्थना करते हैं कि यह इस कष्ट से जल्दी ही मुक्ति मिले और स्वस्थ होकर स्वच्छंद विचरण करें।
