जिस उम्र में हाथों में किताबें लेकर उज्ज्वल भविष्य के सपने बुनने चाहिए थे, उसी उम्र में 17 वर्षीय छात्रा वैष्णवी संतोष निळ का सफर अत्यंत दर्दनाक तरीके से खत्म हो गया। मुरमी (ता. गंगापुर) की इस मासूम लड़की की नृशंस हत्या से पूरा जिला दहल गया है। घर के बगल में रहने वाले और जिसे हक से 'दादा' (भाई) कहा जाए, ऐसे रिश्ते के नानासाहेब मोरे नामक विवाहित दरिंदे ने, वैष्णवी पर अपने विकृत एकतरफा प्यार के चलते उसके सपनों का गला उसके अपने ही घर में रेतकर हमेशा के लिए अंत कर दिया।
गरीबी से जूझ रहे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़!
वैष्णवी का परिवार अत्यंत साधारण परिस्थितियों में अपना गुजर-बसर कर रहा था। उसके पिता संतोष निळ एक छोटी सी पान की टपरी चलाकर घर में हाथ बंटाते थे, जबकि मां मधुरा निळ दूसरों के खेतों में मजदूरी करके परिवार की गाड़ी खींच रही थीं। घर में दादाजी और एक छोटा भाई, ऐसे हंसते-खेलते परिवार के लिए वैष्णवी एक बड़ा सहारा थी। लेकिन, 19 दिसंबर की वह दोपहर इस परिवार के लिए काल बनकर आई। जब माता-पिता काम पर गए थे, तब दरिंदे नानासाहेब मोरे ने घर में घुसकर वैष्णवी का गला रेत दिया। जिस घर में बेटी की शादी या उसकी सफलता के सपने देखे जा रहे थे, वहां अब सिर्फ खून के धब्बे और माता-पिता की चीखें बाकी रह गई हैं।
सबूत मिटाए, पर नियति ने पकड़ ही लिया!
आरोपी नानासाहेब ने कोई भी सबूत न छोड़ने की पूरी कोशिश की थी। हालांकि, वाळूज पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक शिवचरण पांढरे और उनकी टीम ने रात भर जागकर, तकनीकी सुरागों को जोड़ते हुए महज 4 घंटों के भीतर इस दरिंदे को बेड़ियों में जकड़ लिया। खुद दो साल की छोटी बच्ची का पिता होने के बावजूद इस अपराधी को वैष्णवी में अपनी बहन या बेटी नजर नहीं आई, यह समाज का बड़ा दुर्भाग्य है!
चौखट: गंगापुर में छात्राएं कब होंगी सुरक्षित? तालुका में कुछ ही दिन पहले एक शिक्षक द्वारा छात्रा के साथ अत्याचार की शर्मनाक घटना घटी थी। वह जख्म अभी ताजा ही था कि अब वैष्णवी की इस नृशंस हत्या ने समाज की मानसिकता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अगर स्कूल में शिक्षक और घर के बगल में रहने वाले लोग ही रक्षक के बजाय भक्षक बन जाएंगे, तो माता-पिता अपनी बेटियों को सुरक्षित कहां रखें? यह सवाल अब हर मां-बाप पूछ रहा है।
चौखट: दिल्ली तक पहुंची वैष्णवी के खून की पुकार! इस घटना की भयावहता को देखते हुए, मामले की विस्तृत जानकारी राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राज्य महिला आयोग को ईमेल के जरिए भेज दी गई है। इस दरिंदे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर फांसी की सजा दिलाने के लिए वरिष्ठ स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं।
चौखट: जनभावना और आक्रोश "एक मेहनतकश पिता की बेटी इस तरह चली जाएगी, ऐसा सोचा न था। ऐसे आरोपी पर दया न दिखाते हुए उसे फांसी ही दी जानी चाहिए," यह दृढ़ मांग पूर्व सरपंच विक्रम राउत ने की। वहीं ज्योतीताई गायकवाड़ ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, "अब सिर्फ निषेध नहीं चाहिए, बल्कि इन दरिंदों को ऐसा सबक सिखाया जाए कि दोबारा कोई बेटियों की तरफ आंख उठाकर न देख सके।"
अकाल अंत: वैष्णवी का अंतिम संस्कार शांतिपूर्वक संपन्न हो गया, लेकिन वह अपने पीछे जो सवाल और अपने गरीब परिवार की आंखों में जो आंसू छोड़ गई है, वे समाज को कभी शांत बैठने नहीं देंगे।
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