नौरोजाबाद//उमरिया
मदनलाल बर्मन की रिपोर्ट
किसानों को टिकाऊ और लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारत कृषक समाज के तत्वावधान में किसान जन जागरूकता शिविर सह किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, राजनीतिक वर्ग के लोग, कृषि विशेषज्ञ तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करना रहा। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि रासायनिक खेती से जहां मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है, वहीं जैविक खेती से मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है। साथ ही इससे किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
कार्यक्रम के दौरान जैविक और प्राकृतिक हाट बाजार का आयोजन भी किया गया। इसमें किसानों द्वारा उत्पादित रसायन मुक्त अनाज, सब्जियां, फल एवं अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए। हाट बाजार के माध्यम से उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं स्वस्थ भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया गया।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और भविष्य में उत्पादन क्षमता में भी सुधार होता है। इसके अलावा यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने किसानों से अपील की कि वे रसायन आधारित खेती से होने वाले दुष्प्रभावों को समझें और जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाकर आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कहा कि यही खेती का भविष्य है और इससे किसान, समाज व प्रकृति—तीनों का कल्याण संभव है।
