📍शिवाजी तांबे की रिपोर्ट — न्यूज़ नेशन81, छत्रपति संभाजीनगर
छत्रपति संभाजीनगर :
जिला परिषद के आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि पर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। इसी बीच राज्यभर के किसानों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। अनियमित बारिश और अतिवृष्टि के कारण फसलों का भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित मदद नहीं मिलने के कारण किसान आक्रोशित हैं। किसानों का आरोप है कि भाजपा सरकार द्वारा घोषित सहायता दर बहुत कम हैं और नुकसान की भरपाई नहीं होती।
किसान संगठनों ने सरकार पर नाराज़गी जताते हुए तुरंत कर्जमाफी और मुआवजा घोषित करने की मांग की है। स्थानीय प्रशासन के पास कई शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय न होने से किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि, “भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद किसानों की समस्याएँ सुलझाने का वादा किया था, लेकिन आज भी न तो मदद मिल रही है और न कर्जमाफी। सिर्फ घोषणाएँ होती हैं, अमल नहीं।”
राज्य के कई हिस्सों में यह नाराज़गी सीधे तौर पर जिला परिषद चुनावों को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में ‘कर्जमाफी का मुद्दा’ इस बार मुख्य चुनावी चर्चा का विषय बनने की संभावना जताई जा रही है।
🔹 शेंदूरवादा सर्कल में भाजपा बनाम राष्ट्रवादी कांग्रेस की सीधी टक्कर होने की संभावना जताई जा रही है।
इस क्षेत्र में दोनों दलों के स्थानीय नेता और गुट सक्रिय हो गए हैं। प्रचार अभियान शुरू हो चुका है। किसानों की नाराज़गी का असर किसे झेलना पड़ेगा और मतदाता किस ओर झुकेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की आहट के चलते शेंदूरवादा क्षेत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष — दोनों ने अपने गुट मज़बूत करने की होड़ शुरू कर दी है।
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🌾 किसानों की प्रतिक्रियाएँ :
“हर चुनाव में कर्जमाफी का मुद्दा उठता है, लेकिन असली माफी किसी को नहीं मिलती। बैंक नोटिस भेज रही हैं, हम परेशान हैं,” — आप्पासाहेब पंडित, किसान, पैठण
“किसान वोट देता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद कोई उसकी सुध नहीं लेता। अब फैसला किसान ही करेगा,” — सुभाष बेडवाल, किसान, दहेगाव
