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मानसिक रूप से विक्षिप्त बुजुर्ग असहाय महिला को मिला जीवनमय सहयोग - NN81



खैरागढ़। मानवता, संवेदनशीलता और सामुदायिक सहयोग की मिसाल पेश करते हुए खैरागढ़ में एक 65 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं बेघर बुजुर्ग महिला बिमला बाई को नया जीवन मिला है। यह सहयोग तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़, पुलिस प्रशासन, शांतिदूत संस्था, बौद्ध समाज एवं स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयास से संभव हो सका। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर, छत्तीसगढ़ एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के अध्यक्ष विजय कुमार होता के निर्देशन तथा तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ की अध्यक्ष मोहनी कंवर एवं सचिव निलेश जगदल्ला के मार्गदर्शन में पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू एवं सुश्री कला प्रजापति द्वारा साइबर अपराध, पॉक्सो एक्ट, लोक अदालत और नालसा की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के दौरान यह जानकारी मिली कि मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला बिमला बाई को सिविल जिला अस्पताल खैरागढ़ में भर्ती कराया गया है।

जांच के दौरान प्रारंभ में महिला ने अपना नाम सावित्री बताया किंतु सही पहचान बाद में बौद्ध समाज खैरागढ़ के अध्यक्ष उत्तम कुमार बागड़े द्वारा बताया कि महिला का वास्तविक नाम बिमला बाई है और वह बीते कई वर्षों से बस स्टैंड क्षेत्र के पास स्थित बुनकर समिति के शेड में कचरों के बीच रहकर भिक्षाटन के माध्यम से जीवन यापन कर रही थी। शांतिदूत संस्था के संयोजक अनुराग शांति तुरे ने बताया कि 3 नवंबर की रात लगभग 8:30 बजे बस परिवहन कार्य से जुड़े नागरिक मंजीत सिंह ने सूचना दी कि एक बुजुर्ग महिला कार की ठोकर से घायल होकर नया बस स्टैंड जोगी पान सेंटर के सामने मरणासन्न अवस्था में गिरी पड़ी हुई है। तत्पश्चात शांतिदूत संस्था की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस के साथ विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन से संपर्क कर आपातकालीन सहायता सुनिश्चित की। बुजुर्ग महिला को तत्काल सिविल अस्पताल खैरागढ़ में भर्ती किया गया जहाँ डॉ.जंघेल और डॉ. जैन ने अपनी टीम के साथ प्राथमिक उपचार देकर उसकी जान बचाई। महिला की सेवा-सुश्रुषा एवं देखभाल में बौद्ध समाज खैरागढ़ की सेवाभावी सदस्याएँ निवेदिता बोमले और सपना गणवीर ने आगे आकर उसका स्नान, डायपर परिवर्तन, बाल कटवाने और देखरेख की जिम्मेदारी निभाई वहीं बौद्ध समाज के संरक्षक मधुकर चोखान्द्रे, उपासक देवेंद्र नागदेवे, चंद्रकांत बिदानी शाँतिदूत संस्था के सेवाभावी याहिया नियाजी मनोहर सेन, आकाश तिवारी, चंद्रेश कुमार कोसरे ने उल्लेखनीय सहयोग दिया और इस मानवीय पहल से महिला में जीवन की जिजीविषा पुनर्जीवित हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बिमला बाई बीते पाँच से छह वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ होकर भिक्षाटन करते हुए जीवन यापन कर रही थी और उसका कोई परिजन या संरक्षक नहीं है। ऐसे में सामुदायिक सहयोग और न्यायिक तंत्र की संवेदनशील भूमिका ने उसे जीवन की नई दिशा दी। आगे के उपचार के लिए महिला को छत्तीसगढ़ राज्य मनोरोग चिकित्सालय, सेंद्री (बिलासपुर) रेफर किया गया। इस संबंध में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि शर्मा द्वारा आवश्यक निर्देश जारी किए गए जिनके अनुसार महिला को चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहाँ उसका उपचार डॉ.दीप्ति और उनकी टीम द्वारा किया जा रहा है। बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त बुजुर्ग महिला के सीने की हड्डियां टूटी हुई है जिसके त्वरित उपचार के लिए उसे एम्स बिलासपुर में दाखिल कराया गया है। टूटी हड्डी के उपचार के बाद बिमला बाई को मनोचिकित्सालय में मानसिक स्वास्थ्य उपचार के लिए भर्ती किया जाएगा और उसके बाद शांतिदूत संस्था के सहयोग द्वारा बुजुर्ग महिला के आगे जीवन यापन की व्यवस्था की जाएगी। बुजुर्ग महिला की सहायता में उपनिरीक्षक शंकर लाल टंडन, प्रधान आरक्षक रति राम साहू, महिला आरक्षक आरती चंद्राकर एवं मनीषा कहरा सहित थाना व रक्षित आरक्षी केंद्र खैरागढ़ का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। बहरहाल यह घटना खैरागढ़ में न केवल प्रशासनिक तत्परता बल्कि मानवीय संवेदना, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है।

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