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कुलदेवी-देवता कौन होते हैं, कैसे पता लगाएं, इनकी पूजा क्यों है जरूरी-NN81

कुलदेवी-देवता हिंदू धर्म में परिवार या कुल के रक्षक माने जाते हैं। ये पूर्वजों द्वारा चुने गए देवी-देवता होते हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी पूजे जाते हैं। सनातन धर्म में विशेष पूजा-पाठ या शुभ काम में कुल के देवी-देवता को जरूर याद किया जाता है।

कुल देवता आमतौर पर कुल देवी और कुल देवता के रूप में जाने जाते हैं। इन्हें कुल का रक्षक माना जाता है और जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों जैसे शादी, जन्म, नामकरण आदि अनुष्ठानों के समय इनकी पूजा जरूर की जाती है। कहते हैं कुल देवी-देवता की पूजा से परिवार को सुख, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही दुर्भाग्य दूर हो जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार अगर कुल देवी-देवताओं को पूजा न जाए तो ये नाराज हो जाते हैं जिससे जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कहते हैं इनकी पूजा से पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। चलिए जानते हैं कुल देवी-देवता का कैसे पता लगाएं।


अपने कुलदेवी या कुलदेवता का कैसे पता लगाएं?

इस बारे में अपने परिवार के बुजुर्गों से पूछें। आप अपने माता-पिता, दादा-दादी या चाचा-ताऊ से कुल देवी-देवता के बारे में जान सकते हैं।

अपने पैतृक स्थान पर जाएं और वहां उन मंदिरों का दौरा करें जहां पर आपके परिवार के लोग पूजा करते थे। वहां के मंदिर या पुजारी आपको इस बारे में बता सकते हैं।

कुंडली से या किसी जानकार पंडित से भी इस बारे में पता लगवा सकते हैं।

कुछ गोत्रों के विशिष्ट देवी-देवता भी होते हैं, जैसे कश्यप गोत्र में कई बार भगवान विष्णु या देवी दुर्गा कुल देवता होते हैं। 

कुछ ज्योतिषी विशेष अनुष्ठान के माध्यम से कुल देवता का पता लगाने का दावा करते हैं।

कुल देवी-देवताओं की पूजा कब-कब की जाती है?

कुछ परिवार रोजाना या सप्ताह में एक बार कुल देवी-देवता की पूजा करते हैं।

कुछ लोग अमावस्या, पूर्णिमा या कुछ खास तिथियों पर इनकी पूजा करते हैं।

शादी से पहले या बाद में कुल देवी-देवता की पूजा अनिवार्य मानी जाती है।

बच्चे के जन्म, नामकरण या अन्य संस्कारों के समय भी कुल देवता की पूजा जरूर की जाती है।

विशेष रूप से कई लोग अपनी कुल देवी की पूजा नवरात्रि के दौरान करते हैं।

दिवाली, होली और दशहरा जैसे प्रमुख त्योहारों पर भी कुल देवी-देवता को याद किया जाता है।

कुछ परिवारों में कुल देवी-देवता से जुड़े विशेष दिन या मेले होते हैं जहां कुल देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है।

परिवार में कोई कठिनाई, बीमारी या परेशानी होने पर भी कुल देवी-देवता को याद करने से लाभ मिलता है।

नए कार्य की शुरुआत के समय भी कुल देवी-देवता को याद किया जाता है।

कई परिवार अपने कुल देवी-देवता के मंदिर में साल में एक बार विशेष पूजा या अनुष्ठान करते हैं, जिसे "कुल पूजा" कहा जाता है। ये पूजा सामूहिक रूप से की जाती है।

सरल शब्दों में समझें तो कुल देवी-देवता की पूजा का समय परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है। जैसे कुछ परिवार नवरात्रि के पहले दिन कुल देवी की पूजा करते हैं, तो कुछ अंतिम दिन।

अगर कुलदेवी-देवता का पता न चल पाए तो क्या करें?

अगर आपको किसी भी माध्यम से अपने कुल देवी-देवता का पता नहीं चल पाया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आप अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर एक सामान्य पूजा शुरू करें और धीरे-धीरे परंपराओं का निर्माण करें। कुछ विद्वानों अनुसार कुल देवी-देवता का पता न होने पर आप गणेश जी, भगवान शिव, दुर्गा माता और भगवान विष्णु किसी को भी अपना कुल देवता मानकर उनकी पूजा कर सकते हैं।

कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा से क्या होता है?

ऐसी मान्यता है कि कुलदेवी और कुलदेवता की पूजा से परिवार पर कोई बड़ा संकट नहीं आता। साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि सदैव बनी रहती है। बिना उनकी पूजा के किसी भी शुभ काम की शुरुआत नहीं की जाती। 


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