नारायणपुर छत्तीसगढ़
संवाददाता -खुमेश यादव
नारायणपुर जिले की आदिवासी लड़कियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर भेजने की कोशिश करते हुए ईसाई समुदाय के दो नन और एक एजेंट सुखमन को पकड़ा गया। इस संबंध में जनजाति सुरक्षा मंच नारायणपुर कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम से ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में धर्मांतरण बंद करने एवं पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में क्रिश्चियन मिशनरियों पर आदिवासी क्षेत्रों में स्थित भोले भाले आदिवासियों को नौकरी दिलाने का लालच देकर और बहला फुसलाकर आदिवासी बहन बेटियों को बाहर ले जाकर देह व्यापार और मानव तस्करी करने की बात कही है। मंच के सदस्य ने बताया है कि, जिले में लगातार बाहरी लोगों के द्वारा अबूझमाड़ के जनजातीय लोगों से मिलकर लालच देकर और बीमारी ठीक करने का बहाना बना कर भोले_भले आदिवासियों का धर्मांतरण/मतांतरण कराया जा रहा है। मंच के पदाधिकारी ने बताया कि, उन लड़कियों का बयान भी सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देखा गया कि, कमलेश्वरी प्रधान नामक युवती को अन्य धर्म के धर्माचार्य के पोस्टर के साथ खड़ी है और बताया कि, उसकी मां की तबीयत ठीक करने के लिए कुछ पास्टर और उनके साथ कुछ बाहरी लोगों के द्वारा चंगाई करने के और अस्पताल की दवाई आदि से ठीक करने के नाम से चर्च ले जाने लगे तथा धर्मांतरण करने की बात कही। जिससे यह बात साबित होता है कि, जिले में नौकरी का लालच देकर धर्मांतरण करके आदिवासियों की संस्कृति पर हमला किया जा रहा है।
इसलिए ऐसे मतांतरित जनजाति परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए और सरकारी लाभ ले चुके लोगों से नियमानुसार वसूली करना चाहिए एवं शासकीय सेवा करने वालों को बर्खास्त किया जाए और उनके द्वारा लिए जा रहे दोहरे लाभ को समाप्त करने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए क्योंकि हमको अपनी आदिवासी संस्कृति के कारण ही ये लाभ मिलता है वो लोग हमारे अधिकार को छीनते हुए अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले आरक्षण का फायदा उठा रहे हैं और हमारी ही बहन बेटियों को बेच रहे हैं और तो और हमारी सदियों पुरानी संस्कृति को धर्मांतरण करवा कर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
जिस क्षेत्र में हमारे जनजाति लोग निवास करते हैं वहां पिछले कुछ वर्षों से सैकड़ों लड़के लड़कियों को काम दिलाने के बहाने अन्य प्रदेशों में भेजा जा चुका गया है। जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए ऐसे लोगों को चिन्हित करके कार्यवाही करने का निवेदन करते हैं। उनका कहना है कि, सभी आदिवासी दादा दीदी मन आदिवासी दिवस के अवसर पर एक काम अपने हाथ में लें अपने आस पास जो मतांतरित जनजाति के परिवार हों उनको हमारी गौरवमयी आदिवासी देवी देवताओं की शक्ति तथा संस्कृति से परिचय करायें या अपनी शौर्य की गाथा बताना चाहिए।
