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कच्ची हंडी काठ की चढ़े न दूजी बार- बाल ब्रम्ह.बसंत जी महाराज - NN81



लक्ष्मण रैकवार तेन्दूखेड़ा

तेन्दूखेड़ा-  नगर में वर्षावास हेतु विराजमान इतिहास रत्नाकर बाल ब्रम्ह. बसंत जी महाराज ने पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म पर तारण भवन में धर्मसभा को सम्बोधित किया,उन्होंने कहा कि- सच्चा जिन वही है जो जिनवाणी माँ में अटल श्रद्धान रखता हैं।

 छल कपट करना विश्वास घाट करना माया कषाय का लक्षण है।

मन वचन काय की कुटिल परिणति को मायचार कहते है।

कपट के तट झट खुलते है।माया बाहर से स्वच्छ,अंदर से काली रहती है।धन के लिये छल- बल का प्रयोग सरलता को नष्ट करते है।मायावी का कोई अपना नही होता वह सभी को संदेह की दृष्टि से देखता है।मायावी जीव धोखाधड़ी से कभी किसी को ठग सकता है,हर किसी को नहीं ठग सकता है।काठ की हांडी कच्ची होती है और एक बार ही चढ़ती है।लौकिक कार्यो की सिद्धि मायचार से नही बल्कि पूर्व पुण्य के उदय से होती हैं।कपटी व्यक्ति ह्रदय से क्रूर परिणामी होता है,पर  वाणी से मधुर बोलता है।

रामचरित मानस में कहा है-निर्मल जन मन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा। इसका मतलब है जो व्यक्ति मायाचार छल कपट से रहित होता है,ऐसे निर्मल मन वाला ही परमात्मा को प्राप्त करता है।भगवान महावीर स्वामी ने कहा था कि- छल कपट से रहित ह्रदय ही सम्यग्दर्शन को प्राप्त करने का अधिकारी है।


तारण गुरु वसंत मण्डल के सक्रिय सदस्य सिद्धम जैन और पचंदीप्ति बालिका मण्डल से बहिन स्वाति जैन ने बताया कि-प्रतिदिन प्रातः काल मे मंत्रजप और मंदिर विधि का क्रम बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ सभी धर्मप्रेमी माताओं,बहिनों और पुरुष वर्ग,बच्चो,युवा वर्ग द्वारा की जाती है,साथ ही सुबह मंदिर विधि के समय और रात्रि में रूपेश जैन भोपाल द्वारा भजनों के माध्यम से  तारण स्वामी और  जैन भजनों  पर आधारित गुरुभक्ति और संगीतमय अपने कंठ की सुरमय आवाज से सभी को बांध लेते है,जिसमे सभी बच्चे, माताएं,बहिनें और युवा वर्ग,बड़े, बुजुर्ग सभी नृत्य करते हुये भक्तिभाव से जिनवाणी माँ की आराधना वंदना करते है।


साथ ही प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमो के माध्यम से रोचक प्रतियोगिता भी आयोजित हो रही है,जो सार्थक सन्देश दे रही है।

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