रिपोर्ट : नरेन्द्र अरज़रिया
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी से परिवारजन सहित नई दिल्ली संसद भवन में आत्मीय एवं सौहार्दपूर्ण भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
इस अवसर पर 1857 की क्रांति के अंतिम रणबांकुरे, वीर योद्धा एवं हमारे #हिण्डोरिया_महदेले_लोधी_कुटुंब के पूर्वज राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की प्रतिमा उन्हें भेंट की।
माननीय प्रधानमंत्री जी को #राजा_किशोर_सिंह_लोधी_जूदेव के अद्वितीय शौर्य, बलिदान एवं 1842-1857 स्वतंत्रता संग्राम में उनके ऐतिहासिक योगदान से अवगत कराया। साथ ही, दमोह में हमारे हिंडोरिया महदेले लोधी कुटुम्ब द्वारा प्रस्तावित राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की भव्य प्रतिमा के #लोकार्पण समारोह में पधारने हेतु सादर आग्रह किया।
राजा किशोर सिंह जू भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1842 क्रांति में लड़ने वाले हिंडोरिया रियासत के वीर शासक एवं 1857 की क्रांति के अंतिम महानायकों में थे।
वर्ष 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने राजगढ़ी हिंडोरिया को अपनी #8_पाउंड_की_तोपों से ध्वस्त कर दिया था, जिसके अवशेष आज भी इतिहास के साक्षी हैं।
ब्रिटिश सरकार ने राजा किशोर सिंह लोधी जूदेव को #जीवित या #मृत पकड़ने पर ₹1000 का इनाम घोषित किया था।
1857 की क्रांति के दौरान दमोह लगभग #10_माह_तक_अंग्रेजी_शासन_से_मुक्त_रहा। उन्होंने मध्य प्रदेश दमोह जिला के कुम्हारी थाने से 4:30 महीने विद्रोह का संचालन किया। यह अखंड भारत के इतिहास की एक अद्वितीय घटना मानी जाती है।
दिसंबर 1858 तक राजा किशोर सिंह जू अंग्रेज सरकार के विरुद्ध संघर्षरत रहे और अंग्रेज सरकार की #अंतिम_संधि_10_अगस्त_1858 में उनके साथ ही हुई। इसी कारण उन्हें 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से अंतिम समय तक लड़ने वाले वीर राजा के रूप में स्मरण किया जाता है।.....................................दामोंह् से नरेन्द्रअरजरिया कीरिपोर्ट


