संवाददाता : नेम सिंह चौहान
वर्तमान में लागू जटिल ई-टोकन व्यवस्था के कारण सोसायटियों में खाद की भारी किल्लत हो रही है और किसानों को अपनी ही फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा : NN81
आज रायसेन जिले का बाड़ी ब्लॉक एक ऐतिहासिक गवाह बना है, जहाँ अन्नदाताओं ने अपनी जायज़ मांगों को लेकर एक विशाल किसान महाआंदोलन का शंखनाद कर दिया है। 'अकेले कभी जीत नहीं सकते, संगठित कभी हार नहीं सकते' के संकल्प के साथ हजारों की संख्या में किसान आज सड़कों पर उतरे।"
"इस महाआंदोलन का मुख्य केंद्र मूंग की फसल की 100% सरकारी खरीदी सुनिश्चित करना है। किसानों का साफ तौर पर आरोप है कि वर्तमान में लागू जटिल ई-टोकन व्यवस्था के कारण सोसायटियों में खाद की भारी किल्लत हो रही है और किसानों को अपनी ही फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। किसान मांग कर रहे हैं कि इस टोकन सिस्टम को तुरंत बंद कर सोसायटियों में पर्याप्त खाद का इंतजाम किया जाए। इसके साथ ही बारना बांध की नहरें तत्काल खोलने और ग्रामीण क्षेत्रों में थोपे जा रहे स्मार्ट मीटरों को फौरन हटाने की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है।"
"आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह चौहान व उदयपुरा विधानसभा के पूर्व विधायक देवेंद्र पटेल व अन्य नेताओ ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी 10 घंटे बिजली आपूर्ति और मूंग उपार्जन की मांगों को तुरंत स्वीकार नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र रूप अख्तियार करेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्र सरकार तक अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए अन्नदाता किसी भी हद तक जाने को तैयार है।"
इस महाआंदोलन और प्रदर्शन के बाद किसानों का प्रतिनिधिमंडल तहसील कार्यालय पहुंचा, जहां प्रशासनिक अफसरों को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। न्यूज़ नेशन 81 ने जब इस विषय पर प्रशासनिक अधिकारियों से सीधी बात की, तो उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसानों की स्थानीय समस्याओं का त्वरित निराकरण जिला स्तर पर किया जाएगा और नीतिगत मांगों से जुड़े प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से राज्य शासन और संबंधित मंत्रालयों को प्रेषित किया जा रहा है।"
प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यूज़ नेशन 81 से चर्चा के दौरान बताया कि किसानों की जायज़ मांगों और समस्याओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। स्थानीय स्तर की समस्याओं (जैसे खाद वितरण और नहरों का प्रबंधन) की समीक्षा कर उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जा रहा है, जबकि फसल उपार्जन सीमा और बिजली की नीतिगत मांगों के ज्ञापन को उच्च स्तर पर शासन को भेजा जा रहा है।

