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सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी पर ग्राम सभाओं ने जताई नाराजगी, 20 जुलाई को कलेक्टर से करेंगे मुलाकात : NN81


सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी पर ग्राम सभाओं ने जताई नाराजगी, 20 जुलाई को कलेक्टर से करेंगे मुलाकात |:

कांकेर। गोंडवाना भवन, सिंगारभाट में बुधवार को सामुदायिक वन संसाधन (सीएफआर) प्रबंधन कार्ययोजना के क्रियान्वयन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में आँछीडोंगरी, मालगांव, डब्बीपानी, रावस, तिरियारपानी, लेंडारा एवं भीमाडीह ग्रामों के लगभग 60 महिला एवं पुरुष प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के सदस्यों का पारंपरिक रूप से पीला चावल एवं पुष्प भेंट कर स्वागत के साथ हुआ।

कार्यशाला में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन की अब तक की प्रगति, ग्राम सभाओं की भूमिका तथा कार्ययोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। बलराम पटौदी ने बताया कि संबंधित ग्राम सभाओं ने प्रबंधन समिति गठन, संसाधनों का आकलन, सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना का निर्माण तथा उसे उपखंड स्तरीय समिति, कांकेर में प्रस्तुत करने तक की प्रक्रिया पूरी कर ली है। उन्होंने ग्राम सभाओं द्वारा प्रथम वर्ष में किए जाने वाले प्राथमिक कार्यों, जंगल संरक्षण के लिए संचालित "ठेंगा पाली" व्यवस्था तथा ग्राम सभा आधारित वन प्रबंधन की जानकारी भी साझा की।

जागृति सेवा संस्था, अभनपुर के परियोजना संचालक श्री कृष्णा प्रसाद सिन्हा ने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार केवल अधिकार पत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राम सभाओं को उनके अधिकारों के प्रभावी उपयोग के लिए संगठित होकर पहल करनी होगी। उन्होंने बताया कि कई ग्राम सभाओं द्वारा लगभग आठ माह पूर्व सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजनाएं संबंधित समिति में प्रस्तुत की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक उन पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही उपखंड स्तरीय समिति में लंबित 12 ग्रामों के सीमा विवाद संबंधी प्रकरणों पर भी निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने इन मुद्दों के समाधान के लिए ग्राम सभाओं द्वारा सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष प्रभावी पैरवी (एडवोकेसी) करने पर बल दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य कृष्ण कुमार वैष्णव ने कहा कि ग्राम सभाओं की सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजनाएं कई माह पूर्व उपखंड स्तरीय समिति में जमा हो चुकी हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्वीकृति नहीं मिली है और न ही ग्राम सभाओं को उनके क्रियान्वयन के लिए बजट उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों से जिला प्रशासन से सीधे चर्चा कर वस्तुस्थिति जानने का सुझाव दिया। इस पर सभी संबंधित ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से 20 जुलाई को जिला कलेक्टर से मुलाकात कर कार्ययोजनाओं की स्वीकृति, बजट आवंटन एवं लंबित प्रकरणों की स्थिति पर चर्चा करने का निर्णय लिया।

जिला लघु वनोपज सहकारी संघ के लाख पालन विभाग के अधिकारी हेमंत सूर्यवंशी ने लाख उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धति, लागत, संभावित आय, लाख से तैयार होने वाले उत्पादों तथा विभाग द्वारा किसानों को उपलब्ध कराई जाने वाली सब्सिडी एवं तकनीकी सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से लाख पालन को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाने का आह्वान किया।

सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष (युवा प्रभाग) योगेश नरेटी ने कहा कि वन, जल और जमीन आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवन-पद्धति का आधार हैं। उन्होंने कहा, "जंगल बचेगा तभी आदिवासी संस्कृति बचेगी।" उन्होंने ग्राम सभाओं से अपील की कि सीमा विवादों का समाधान पारंपरिक व्यवस्थाओं और आपसी सहमति से करते हुए सामुदायिक वन संसाधनों पर अपने अधिकारों को मजबूत करें तथा प्रबंधन के माध्यम से आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करें।

कार्यशाला में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन अधिकार प्राप्त ग्राम सभाओं के प्रबंधन समिति सदस्यों को सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन कार्ययोजना के क्रियान्वयन, विभागीय योजनाओं के अभिसरण, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता तथा ग्राम सभा की भूमिका को सशक्त बनाने संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में समुदाय प्रशिक्षक कलेश बघेल, मदीना मंडावी, प्रहलाद दास मानिकपुरी, लेखाकार दानेंद्र कुमार साहू, संस्था के बोर्ड अध्यक्ष गंभीर चंद्राकर सहित विभिन्न ग्राम सभाओं के प्रबंधन समिति सदस्य एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

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