विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कृषि आयुक्तालय जयपुर के निर्देशानुसार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गढ़ पाछली आमली के सभागार में प्राकृतिक खेती विषयक कृषक गोष्ठी एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. धीरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, भूमि की घटती उर्वरा शक्ति और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के बीच प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक कृषि पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया।
कृषि अधिकारी कजोड़मल गुर्जर ने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, आच्छादन और वाफसा जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान कर रहा है, जिससे कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके। उन्होंने खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देने की अपील की।
गोष्ठी में सहायक कृषि अधिकारी प्रह्लाद सहाय सारस्वत, कृषि पर्यवेक्षक मंजू गुर्जर, मदनलाल रेगर एवं ज्योति लड्डा ने भी प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता गोपाललाल चौधरी, भाजपा किसान मोर्चा जिला प्रभारी गोविंद वैष्णव, सहायक सचिव सांवरमल ढोली, व्यवस्थापक देवीलाल जाट, एफपीओ डायरेक्टर विनोद जाट सहित अनेक किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया।
