-सीएचसी में कूलर-पंखे भेंट करने पर उठे सवाल, पहले बताई थीं व्यवस्थाएं चाक-चौबंद
पलिया नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) में सोमवार को पलिया नगर व्यापार मण्डल (कंछल गुट) द्वारा चार सीलिंग फैन और तीन कूलर भेंट किए जाने के बाद नगर में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि अस्पताल की व्यवस्थाएं पहले से ही बेहतर और पर्याप्त थीं, तो फिर अतिरिक्त कूलर और पंखों की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।
गौरतलब है कि बीते दिनों स्थानीय मीडियाकर्मियों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की विभिन्न कमियों और अव्यवस्थाओं को लेकर समाचार प्रकाशित किए गए थे। इन खबरों में अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और संसाधनों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। इसके बाद व्यापार मण्डल के पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे थे और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
निरीक्षण के उपरांत व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से अस्पताल की व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए कहा था कि उन्हें सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद मिली हैं। उस समय व्यापार मण्डल का यह बयान मीडिया में प्रकाशित खबरों के विपरीत माना गया था और इसे अस्पताल प्रशासन के पक्ष में खड़े होने के रूप में देखा गया था।
अब व्यापार मण्डल द्वारा अस्पताल को चार सीलिंग फैन और तीन कूलर भेंट किए जाने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त थीं, तो फिर इन संसाधनों की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का कहना है कि यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से अस्पताल में सुविधाओं की कमी को स्वीकार करने जैसा प्रतीत होता है।
कुछ नागरिकों ने यह भी राय व्यक्त की कि यदि व्यापार मण्डल सामाजिक सरोकार के तहत सहायता करना ही चाहता था, तो आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को कूलर व पंखे उपलब्ध कराना अधिक उपयोगी साबित हो सकता था। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अस्पताल में यदि वास्तव में इन उपकरणों की आवश्यकता थी तो व्यापार मण्डल को स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों के समक्ष संसाधनों की मांग को प्रमुखता से उठाना चाहिए था, ताकि सरकारी स्तर पर स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
फिलहाल व्यापार मण्डल की ओर से किए गए इस सहयोगात्मक कदम को लेकर नगर में पक्ष-विपक्ष की चर्चाएं जारी हैं। एक ओर इसे सामाजिक दायित्व के निर्वहन के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पहले दिए गए बयानों और वर्तमान सहयोग के बीच विरोधाभास को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
पीयूष गुप्ता
