*- 62 हजार 683 से अधिक श्रमिकों को मिल रहा रोजगार*
*- 3923 निर्माण कार्यों से गांवों में बढ़ा रोजगार, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को मिली नई गति*
*- मनरेगा के तहत 21 लाख 45 हजार 386 मानव दिवस सृजित, 2093 परिवारों को 100 दिवस रोजगार*
*- 600 दिव्यांग परिवारों को भी मिला रोजगार*
दुर्ग, 03 जून 2026/ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से दुर्ग जिले की सभी 300 ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों के जरिए जिले के 62 हजार 683 से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में वर्तमान में 3923 निर्माण कार्य प्रगति पर हैं, जिनसे एक ओर ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुदृढ़ हो रही है, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन एवं ग्रामीण अधोसंरचना विकास को भी नई दिशा मिल रही है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे के निर्देशन में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में जॉब कार्डधारी श्रमिकों को निरंतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, कार्यक्रम अधिकारियों एवं मैदानी अमले को श्रमिकों की मांग के अनुसार तत्काल कार्य उपलब्ध कराने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिले में किसी भी पात्र श्रमिक को रोजगार के लिए भटकना न पड़े और प्रत्येक ग्राम पंचायत में पर्याप्त संख्या में कार्य संचालित रहें। मजदूरी भुगतान को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए बैंक खाते एवं आधार सत्यापन की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूर्ण किया गया है। इससे मजदूरी राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है।
मनरेगा के अंतर्गत जिले में अब तक 21 लाख 45 हजार 386 मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं। साथ ही 2093 परिवारों को 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया है तथा 600 दिव्यांग परिवारों को भी रोजगार से जोड़ा गया है। यह उपलब्धि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जनपद पंचायतवार स्थिति पर नजर डालें तो जनपद पंचायत दुर्ग अंतर्गत 1048 कार्यों में 18 हजार 256 श्रमिक कार्यरत हैं। इसी प्रकार जनपद पंचायत धमधा अंतर्गत 1687 कार्यों में 17 हजार 785 श्रमिक तथा जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत 1188 कार्यों में 28 हजार 644 श्रमिक रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में अमृत सरोवर निर्माण, नवीन तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, आजीविका डबरी निर्माण, वाटर हार्वेस्टिंग टैंक (डब्ल्यूएचटी), कच्ची सिंचाई नाली निर्माण तथा अन्य मजदूरी मूलक कार्य प्राथमिकता से संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ कृषि उत्पादन क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है।
जिले में मनरेगा के तहत कुल 33 करोड़ 91 लाख 90 हजार रुपये की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसमें जनपद पंचायत दुर्ग के श्रमिकों को 11 करोड़ 76 लाख 75 हजार रुपये, जनपद पंचायत धमधा के श्रमिकों को 10 करोड़ 58 लाख 57 हजार रुपये तथा जनपद पंचायत पाटन के श्रमिकों को 9 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। इसके अतिरिक्त अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों के माध्यम से 2 करोड़ 56 लाख 43 हजार रुपये की मजदूरी राशि का भी भुगतान किया जा चुका है।
गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी तकनीकी सहायकों को कार्यस्थलों पर नियमित निरीक्षण, सूचना बोर्ड स्थापना तथा निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। इससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल रही है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि वर्ष 2026-27 में जिले में बड़े पैमाने पर मजदूरी मूलक निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जनपद पंचायत दुर्ग में 183 निर्माण कार्यों के लिए 1480.18 लाख रुपये, जनपद पंचायत धमधा में 149 निर्माण कार्यों के लिए 1212.84 लाख रुपये तथा जनपद पंचायत पाटन में 249 निर्माण कार्यों के लिए 1984.63 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार जिले में कुल 581 निर्माण कार्यों के लिए 4677.65 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। जिले में संचालित निर्माण कार्यों से आने वाले वर्षों में किसानों, श्रमिकों और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास को नई मजबूती मिलेगी।
अनिल जोशी
