फतेहपुर में नशे का नेटवर्क अब सिर्फ पुलिस फाइलों का मामला नहीं…
बल्कि जिले की युवा पीढ़ी पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
आरोप है कि जिले में भांग के लाइसेंसी ठेकों की आड़ में गांजे का काला कारोबार खुलेआम चल रहा है…
और हैरानी की बात ये कि हर गली, हर कस्बे और हर चौराहे तक नशे की सप्लाई पहुंच रही है।
सबसे बड़ा सवाल…
जब पुलिस और आबकारी विभाग को हर ठिकाने की जानकारी है, तो आखिर गांजा माफिया अब तक कानून के शिकंजे से बाहर क्यों हैं?
क्या कार्रवाई सिर्फ छोटी मछलियों तक सीमित है?
या फिर जिले में नशे का ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है, जिसके आगे सिस्टम भी बेबस नजर आ रहा है?
इसी बीच कल्याणपुर पुलिस ने 5 किलो 200 ग्राम अवैध गांजे के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार कर बड़ी कार्रवाई का दावा किया है…
लेकिन इस गिरफ्तारी ने पूरे नेटवर्क पर और भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
फतेहपुर में अवैध गांजे के कारोबार को लेकर लगातार सनसनीखेज आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिले के कई इलाकों में भांग के ठेकों की आड़ में गांजे की बिक्री धड़ल्ले से चल रही है।
हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि स्कूल, कॉलेज और बाजारों के आसपास तक नशे का जाल फैल चुका है।
लोगों का कहना है कि नशा तस्कर अपने एजेंटों के जरिए मोहल्लों और चौराहों तक गांजे की सप्लाई कर रहे हैं।
कई बार वीडियो वायरल होने और शिकायतें पहुंचने के बावजूद बड़े नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पाती।
यही वजह है कि अब सवाल सीधे सिस्टम की कार्यशैली पर उठने लगे हैं।
इसी बीच पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के निर्देशन में थाना कल्याणपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक चेकिंग के दौरान बिना नंबर प्लेट की बाइक से जा रहे दो संदिग्धों को रोका गया, जिनके कब्जे से 5 किलो 200 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सशील तिवारी और शिवशंकर तिवारी के रूप में हुई है।
दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय भेज दिया गया है।
पुलिस ने मौके से बिना नंबर प्लेट की बाइक भी बरामद की है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है…
क्या केवल दो तस्करों की गिरफ्तारी से जिले का पूरा नशा नेटवर्क खत्म हो जाएगा?
या फिर इसके पीछे बैठे बड़े सप्लायर और कथित संरक्षण देने वाले चेहरे अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं?
जिले के लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन चाहे तो नशे के इस नेटवर्क की कमर कुछ ही दिनों में तोड़ी जा सकती है।
जरूरत है सिर्फ लगातार और निष्पक्ष कार्रवाई की…
क्योंकि अब ये लड़ाई सिर्फ कानून व्यवस्था की नहीं… बल्कि युवा पीढ़ी को नशे के दलदल से बचाने की है।
