अमरोहा के जिला न्यायालय परिसर में आयोजित वर्ष 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत केवल कानूनी मामलों के निस्तारण का मंच नहीं रही, बल्कि यह कई लोगों के लिए राहत, मेल-मिलाप और नई शुरुआत का अवसर भी बन गई। शनिवार को आयोजित इस विशेष लोक अदालत में 1,08,515 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि कुल 1,23,811 वाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रशासनिक न्यायमूर्ति अवनीश सक्सैना ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें केवल न्यायिक प्रक्रिया को गति नहीं देतीं, बल्कि समाज में जागरूकता और आपसी विश्वास को भी मजबूत करती हैं। उनके अनुसार, समाज और राष्ट्र की उन्नति में हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है और लोक अदालत इसी भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम है।
जनपद न्यायाधीश विवेक ने कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जहां आपसी सहमति और संवाद के जरिए विवादों का समाधान किया जाता है। इससे लोगों को कम खर्च में त्वरित न्याय मिलता है और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से राहत भी मिलती है।
लोक अदालत के दौरान जिला न्यायालय की विभिन्न पीठों पर न्यायिक अधिकारियों ने मामलों की सुनवाई की। बैंक, विद्युत विभाग, दूरसंचार विभाग और अन्य सरकारी संस्थाओं के लिए विशेष काउंटर भी लगाए गए, जहां लोगों ने आपसी समझौते के आधार पर अपने मामलों का निपटारा कराया।
इस आयोजन की सबसे भावनात्मक तस्वीर परिवार न्यायालय से सामने आई, जहां दो अलग रह रहे दंपतियों ने समझौते के बाद फिर साथ रहने का फैसला किया। न्यायालय परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाई और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में मुस्कुराते हुए साथ रवाना हुए। अदालत परिसर में मौजूद लोगों ने इस दृश्य का स्वागत तालियों से किया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में फौजदारी मामलों के 2,760 वादों का निस्तारण करते हुए करीब 1 लाख 97 हजार रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए। वहीं विद्युत अधिनियम से जुड़े 585 मामलों का निस्तारण किया गया। सिविल मामलों, बैंक ऋण वसूली, पुलिस चालान और दूरसंचार विभाग से जुड़े मामलों सहित विभिन्न प्रकरणों में कुल 1 करोड़ 33 लाख 91 हजार रुपये की वसूली हुई। इसके अलावा जिले की सभी तहसीलों और राजस्व न्यायालयों में भी 1,723 मामलों का समाधान किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमरोहा के सचिव अभिषेक कुमार व्यास ने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य आम लोगों को सस्ता, सरल और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से न केवल अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि समाज में सौहार्द और संवाद की संस्कृति भी मजबूत होती है।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी नितिन गौड़ और पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे। पूरे दिन अदालत परिसर में लोगों की आवाजाही बनी रही और कई चेहरों पर वर्षों पुराने विवाद खत्म होने की संतुष्टि साफ दिखाई दी।
रिपोर्ट मौ। अज़ीम अमरोहा
