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बच्चों की परीक्षा लेने वाले शिक्षक खुद परीक्षा देने को तैयार नहीं, TET के विरोध में निकाली विशाल रैली - NN81


मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से पुनीत शाक्य रिपोर्टर की ख़ास रिपोर्ट 

शिवपुरी। हर साल बच्चों की परीक्षा लेने वाले शिक्षक खुद ही परीक्षा देने को तैयार नहीं हैं। जिसके चलते बुधवार को शासकीय महिलाएं पुरुष शिक्षकों की विशाल रैली शिवपुरी शहर में निकली। शिक्षक चिल्ला रहे थे कि हम टेस्ट नहीं देंगे। सरकार ने सरकारी शिक्षकों की योग्यता को जांचने के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को पास करना जरूरी कर दिया। जिसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं। 

ज्ञात रहे कि कांग्रेस के शासनकाल में जनपदों के माध्यम से शासकीय शिक्षकों की नियुक्ति हुई, जिसमें सैकड़ों अयोग्य  महिला- पुरुष भी शिक्षक बन गए। हालांकि योग्य शिक्षकों की संख्या अधिक है, जिन्हें शायद इस टेस्ट से अधिक परेशानी नहीं है। अब चूंकि परीक्षा से तो सभी को डर लगता है, इसलिए सभी लोग विरोध पर उतारू हो गए। 

आज शाम लगभग 4:30 बजे राजेश्वरी रोड एवं जिला अस्पताल के सामने से होती हुई अस्पताल चौराहा से कलेक्ट्रेट पहुंची। जहां पर एडीएम दिनेशचंद्र शुक्ल को ज्ञापन देकर मांग की है कि 26 मार्च 2026 को जारी किए गए टीईटी परीक्षा का आदेश निरस्त किया जाए। 

प्राइवेट स्कूलों में योग्य शिक्षक आधे वेतन पर 

शासकीय स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को एक टेस्ट महंगा पड़ रहा है, जबकि प्राइवेट स्कूल में योग्य शिक्षकों को सरकारी शिक्षक के वेतन के मुकाबले आधे से भी कम सेलरी में रेगुलर पूरी मेहनत से पढ़ाने को मजबूर हैं। सरकारी स्कूल-कॉलेज में शिक्षकों और प्रोफेसरों को वेतन तो हजारों से सवा लाख रुपए तक मिल रहा है, लेकिन कक्षाओं में वीरानी या फिर पढ़ाई छोड़ खेलते बच्चे मिलेंगे। 

फिल्टर तो जरूरी है

सरकार ने शिक्षकों की योग्यता को जांचने के लिए जो टीईटी परीक्षा रखी है, वो एक फिल्टर है उसका, जिसके हाथों में हजारों बच्चों का भविष्य होता है। इससे होने वाली छंटनी में दूसरे योग्य शिक्षकों को मौका मिलेगा, तथा बच्चों का भविष्य भी संवरेगा।

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