सिवनी केवलारी से
अरुण राजपूत
केवलारी के ग्राम बंदेली में चल रही श्री राम कथा के चतुर्थ दिवस की कथा में पूज्य कथा व्यास जी महाराज ने कहा कि संसार में ऐसा कोई नहीं है जो किसी न किसी से प्रेम न करता हो | ये भगवान् की कथा हमें क्या करना सिखाती है प्रेम का जो विषय है उसे बदलने की शिक्षा देती है जिससे आप प्रेम करते हैं उस पात्र को बदल दीजिए | संसार में लोग धन से प्रेम करते हैं किसी व्यक्ति या स्थान कहीं न कहीं किसी न किसी से करते ही हैं | ये भगवान् की कथा हमें सिखाती है जो जिम्मेदारी हमें मिली है उसका अच्छे से पालन करिए मगर प्रेम करने लायक तो एक ही पात्र है वो है परमात्मा वो है राम | वहां यदि आपका प्रेम हो गया तो संसार में आपको दुःखी नहीं होना पड़ेगा | यहां जिससे प्रेम करोगे तो एक न एक दिन आपको दुःख देगा | मिलकर भी दुःख देगा और बिछुड़ कर भी दुःख देगा | कहीं न कहीं से कुछ न कुछ कष्ट होगा | परमात्मा ही एक ऐसे हैं परमानेन्ट सुख देने वाले जिसको परमानेंट सुख चाहिए उनको भगवान् से प्रेम करना चाहिए | भगवान् की कथा यही सिखाती है और भगवान् से प्रेम कब होगा जब आप अपने धर्म का पालन करेंगे जो व्यक्ति अपने धर्म का पालन करता है | उसी का मन पवित्र होता है जिसका मन पवित्र होता है वही भगवान को प्रिय होता है | अपवित्र मन वाले भगवान् को प्रिय नहीं है |
