लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़
संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर, 27 मार्च 2026//
नारायणपुर जिले के दूरस्थ और कभी नक्सल प्रभावित इलाकों में एक समय ऐसा भी था, जब बचपन डर और असुरक्षा के साये में गुजरता था। यहां बच्चों की दुनिया में स्कूल की घंटियां नहीं, बल्कि माओवादी गतिविधियों की आवाज गूंजती थी। शिक्षा और सपनों की जगह भय और भटकाव ने ले ली थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में हो रहे परिवर्तन को रेखांकित करते हुए अपने संबोधन में रेकावाया का विशेष उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि इस क्षेत्र में स्कूल का संचालन प्रशासन द्वारा प्रारंभ किया गया है, जिससे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सका है।
अब उसी स्कूल का भवन पूर्ण होने के बाद कलेक्टर द्वारा आश्रम सहित पूरे परिसर का विधिवत शुभारंभ किया गया है, जिससे बच्चों को बेहतर सुविधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि “बस्तर, जो कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था, अब विकास का प्रतीक बन रहा है” और नक्सलवाद ‘लाल आतंक’ से ‘शांति व विकास’ की ओर बढ़ रहा है।
इसी परिवर्तन को जमीनी स्तर पर साकार करते हुए जिले के ओरछा विकासखण्ड के अंतिम छोर एवं अति संवेदनशील ग्राम रेकावाया और डुंगा तक पहुंचने वाली पहली कलेक्टर नम्रता जैन ने 150 किमी से अधिक दुर्गम दूरी तय कर क्षेत्र का दौरा किया। उनका यह दौरा प्रशासन की प्रतिबद्धता और जमीनी स्तर पर बदलाव की सशक्त मिसाल बना।
रेकावाया पहुंचकर कलेक्टर ने नव-निर्मित स्कूल भवन एवं बालक आश्रम शाला का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर उनसे संवाद किया, उनके सपनों को सुना और उन्हें पढ़-लिखकर अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने कलेक्टर, पुलिस अधिकारी और शिक्षक बनने की इच्छा जताई, जो क्षेत्र में बदलती सोच का स्पष्ट संकेत है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने आश्रम छात्रावास की व्यवस्थाओं—भोजन, पेयजल, स्वच्छता और आवास—का जायजा लिया। बच्चों की उपस्थिति, पोषण आहार और दैनिक व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। जल जीवन मिशन के तहत स्थापित नलकूपों का अवलोकन किया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनके शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।
उन्होंने रेकावाया से ओरछा तक सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया तथा ग्रामीणों की मांग पर 15 दिनों के भीतर साप्ताहिक बाजार प्रारंभ करने के निर्देश दिए। पीडीएस के तहत राशन वितरण को सुगम बनाने, आंगनबाड़ी में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से आधार, आयुष्मान, राशन कार्ड, बैंक खाता सहित विभिन्न शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
कलेक्टर नम्रता जैन ने बच्चों को कॉपी, किताबें, पेन-पेंसिल और खेल सामग्री वितरित की तथा उनकी समस्याओं को समझते हुए समाधान का भरोसा दिलाया। बच्चों की एलईडी टीवी की मांग को भी गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया गया।
क्षेत्र में स्थापित नए पुलिस कैंपों ने भी इस बदलाव को गति दी है। जहां पहले भय का माहौल था, वहां अब सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बन गया है। आज दूरस्थ गांवों तक शासकीय योजनाएं पहुंच रही हैं, स्कूल और आंगनबाड़ी नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है और ग्रामीणों को समय पर इलाज मिल रहा है। पेयजल और सड़कों की बेहतर व्यवस्था ने गांवों को मुख्यधारा से जोड़ना शुरू कर दिया है। यह बदलाव केवल विकास का नहीं, बल्कि विश्वास का प्रतीक है—जहां कभी बंदूक का साया था, वहां आज कलम की ताकत भविष्य को रोशन कर रही है।
इस दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राजेन्द्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल, जनपद सीईओ ओरछा लोकेश चतुर्वेदी, शिक्षा मिशन समन्वयक दीनबंधु रावटे, प्राचार्य मनोज बागड़े सहित जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
