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त्रिवेणी संगम पर सजी परंपरा की विरासत: मचलेश्वर मेला की आज से शुरुआत :-NN81



जिले के हिरदेनगर मटियारी, बंजर और सुरपन नदियों के पावन त्रिवेणी संगम पर लगभग एक शताब्दी से भरता आ रहा ऐतिहासिक मचलेश्वर मेला आज से विधिवत प्रारंभ हो गया।  महाशिवरात्रि से होलिका दहन तक चलने वाला यह पशु मेला न केवल संभाग, बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। मेले के शुभारंभ के साथ ही दूर-दराज के गांवों से लोगों का आना शुरू हो गया है l और पशु बाजार में रौनक दिखाई देने लगी है। 

पशु व्यापार के साथ बहुरंगी बाजार

मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों से पशु व्यापारी यहां पहुंच रहे हैं। बैल, गाय, भैंस सहित विभिन्न पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए बड़े स्तर पर सौदेबाजी शुरू हो गई है। इसके साथ ही मसाला, कपड़ा, बर्तन, कृषि उपकरण और घरेलू सामानों की दुकानें भी सज गई हैं। खेल-तमाशे और मनोरंजन के साधन मेले को उत्सव का रूप दे रहे हैं।


नाम में बदलाव, पहचान बरकरार


वर्ष 1970 के पूर्व यह मेला “मचलेश्वर मेला हिरदेनगर” के नाम से प्रसिद्ध था। 1971 से 2003 तक इसका नाम “हिरदेनगर मेला” रहा, किंतु बाद में राज्य शासन ने इसकी ऐतिहासिक पहचान को पुनः स्थापित करते हुए “मचलेश्वर मेला हिरदेनगर” नाम बहाल किया।


बदलते दौर में घटती पशु आवक


समय के साथ मेले का स्वरूप भी बदलता दिख रहा है। आधुनिक कृषि यंत्रों के बढ़ते उपयोग से खेती में पशुओं की आवश्यकता कम हुई है, जिससे पशु बाजार की रौनक पहले जैसी नहीं रही। नगर में स्थायी बाजार विकसित हो जाने के कारण लोग अब सालभर आवश्यक सामग्री खरीद लेते हैं, जिससे मेले में खरीदारी का दायरा सीमित होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का रुझान भी अब व्यापार से अधिक मनोरंजन की ओर केंद्रित नजर आता है।


होली के पहले चरम पर पहुंचेगी भीड


मेले की शुरुआत के साथ, चहल-पहल बढ़ गई है, लेकिन असली भीड़ होली पर्व के नजदीक देखने को मिलती है। ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम सप्ताह में पहुंचते हैं। पंचायत द्वारा पशुओं के लिए अलग मैदान निर्धारित किया गया है तथा दोनों ओर पार्किंग की समुचित व्यवस्था की गई है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि मेले में शांति और सुव्यवस्था बनी रहे।


सदियों पुरानी परंपरा


सांस्कृतिक आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की झलक समेटे मचलेश्वर मेला आज भी क्षेत्र की पहचान और लोकजीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।


संवाददाता- गजेंद्र पटेल


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